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जिले में डीएपी की कमी, मुसीबत में किसान

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मऊ। रबी के सीजन में साधन सहकारी समितियों में डीएपी सहित अन्य उर्वरकों का टोटा रहने से किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अनिश्चितकालीन हड़ताल होने से सचिव खाद वितरण में रुचि ही नहीं ले रहे हैं। डीएपी न मिलने से आलू की बुआई पिछड़ने की चिंता किसानों को सताने लगी है। समितियों पर उर्वरक न मिलने से निजी दुकानदारों की खूब चांदी कट रही है। किसानों को मनमाना दाम पर बेच रहे हैं। जबकि विभागीय अधिकारी समितियों पर उर्वरक का पर्याप्त स्टाक होने का दावा कर रहे हैं।
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जिले में किसानों को समय से खाद बीज आपूर्ति के लिए 92 साधन सहकारी समितियां, 10 पीसीएफ, 10 डीसीएफ खोला गया है। इसके अलावा 300 निजी उर्वरक की दुकानें हैं। रबी सीजन मेें किसानों को समय से खाद न मिल रहा है। धान की फसल के बाद आलू की बुआई चल रही है। आलू का खेत तैयार है, लेकिन किसानों को डीएपी नहीं मिल पा रही है। किसानों की मानें तो समितियों के सचिवों का एक नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चल रहे हैं। इसके चलते उर्वरक की डिमांड तक नहीं भेज रहे हैं। समितियों पर डीएपी का स्टाक खत्म हो गया है। समितियों पर डीएपी न मिलने से निजी दुकानदारों की खूब चांदी कट रही है। अधिकारियों की मानें तो रबी सीजन का लक्ष्य 1800 एमटी के सापेक्ष 1659 एमटी डीएपी समितियों पर भेजी जा चुकी है। जबकि हकीकत कुछ और ही है।
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नेमडाड़ साधन सहकारी समिति पर लटक रहा ताला :
फतहपुर मंडाव। रबी सीजन के समय में साधन सहकारी समितियों पर डीएपी का अकाल रहने से किसानों को आलू बुआई पिछड़ने की चिंता किसानों को सताने लगी है। साधन सहकारी समिति नेमडाड़ बंद चल रही है। लेकिन अभी तक प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
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समितियों पर है डीएपी का टोंटा:
बढुआगोदाम। परदहां ब्लाक के विभिन्न साधन सहकारी समितियों पर डीएपी, एनपीके, पोटास, यूरिया का टोटा है। कुछ साधन सहकारी समितियों के गोदामों में स्टाक है, लेकिन कई समितियों में स्टाक खत्म हो गया है। सचिवों के अनिश्चित हड़ताल पर जाने से समितियों में ताला लटक रहा है। खाद की आस में दिनभर चक्कर काटने के बाद किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इससे निजी दुकानों पर कालाबाजारी शुरू हो गई है।
किसानों का कहना है कि जल्द यूरिया और डीएपी नहीं मिली तो आलू और सरसों की फसल चौपट हो जाएगी। परदहां ब्लाक में आठ समिति और दो क्रयविक्रय सहित दस केंद्र हैं। जिसमें भीटी, बकवल, बख्तावरगंज, इटौरा, रैकवारेडीह पर थोडी बहुत खाद मौजूद है। जबकि सलाहाबाद और बढुआगोदाम समिति पर खाद नदारद है। इस बार बारिश के चलते अगेती दलहनी और तेलहनी फसलों की बुआई समय से नहीं हो सकी। अब नवंबर महीने में बुआई ने जोर पकड़ा है और एनपीके, पोटास, यूरिया और डीएपी की मांग बढ़ी है और सचिवों के हड़ताल पर जाने से समितियों पर ताला लटका हुआ हैं और किसानों को समितियों पर खाद नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में निजी दुकानदार निर्धारित दाम से 200 से 300 रुपये अधिक लेकर डीएपी और यूरिया दे रहे हैं। इससे किसानों में जिला प्रशासन के विरुद्ध आक्रोश है।
कोट
पैक्स सचिवों के प्रतिनिधियों से वार्ता हुई है। हड़ताल खत्म होने की बात की है। लक्ष्य 1800 एमटी के सापेक्ष 1659 एमटी डीएपी समितियों पर भेजी जा चुकी है। डिमांड मिलते ही आपूर्ति कर दी जाएगी।
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विवेक कौशल, एआर कोआपरेटिव
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