भगवान कृष्ण के जन्म दिवस के पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाने की चल रही तैयारी रविवार को पूरी हो गई। पर्व के मौके पर पूजा पंडालों में स्थापित होनी वाली प्रतिमाओं को फाइनल टच देने में मूर्ति कलाकार लगे रहे। घरों सजाई जाए जाने वाली झांकियों की तैयारी मेें लोग देर शाम तक लगे रहे।
जनश्रुतियों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को हुआ था। भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। इसके तहत सोमवार को नगर के सिंधी कालोनी, ब्रह्मस्थान, निजामुद्दीनपुरा, सहादतपुरा, मुंशीपुरा, चौक, मिर्जाहादीपुरा, गोला बाजार, रोडवेज, मधुबन, मुहम्मदाबादगोहना, घोसी सहित विभिन्न इलाकों में सोमवार को उत्साह के साथ जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। नगर के शीतला माता धाम, वनदेवी धाम, पावरहाउस स्थित श्रीराम जानकी मंदिर, कैलाशपुरी मंदिर, मठिया टोला शिवाला, औरंगाबाद, हनुमानघाट, ढेकुलियाघाट सिंधी बाबा की कुटी आदि मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की झांकी सजाकर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूजन अर्चन होगा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को देखते हुए पूजा पंडालों में स्थापित होने वाली भगवान कृष्ण की प्रतिमाओं नगर के सहित विभिन्न स्थानों पर बनाई जा रही थी। मूर्तिकार प्रतिमाओं को फाइनल टच देने में लगे रहे। वहीं लोग पर्व के मद्देनजर बाजारों में पूजा सामग्री, सजावटी सामान सहित विभिन्न सामानों की खरीदारी करने में लगे रहे।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर खास योग
मुहम्मदाबादगोहना कस्बा निवासी पं. वीरेंद्र शुक्ल ने बताया कि सोमवार को जन्माष्टमी पर्व मनाया जाएगा। सोमवार को पूूर्वाह्न छह बजकर 16 मिनट के बाद रोहिणी नक्षत्र लग जाएगी। रात 12 बजकर 13 मिनट तक अष्टमी रहेगी। बृष का चंद्रमा रहेगा। हर्षण योग रहेगा। बताया कि लंबे समय बाद जन्माष्टमी के दिन अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र, हर्षण योग मिल रहा है। जन्माष्टमी के दिन अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र एक साथ पड़ रहे हैं, इसे जयंती योग मानते हैं और इसलिए ये संयोग और बेहतर है। द्वापरयुग में जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, तब भी जयंती योग पड़ा था। बताया कि ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर राशि के अनुसार भगवान कृष्ण को भोग लगाने से कान्हा की कृपा बनी रहती है।