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Mau News: पिता और दो पुत्रों को आजीवन कारावास की सजा

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मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर 3 अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने गैर इरादतन हत्या और मारपीट के क्राॅस केस के मामले में नामजद कुल सात आरोपियों के मामले में सुनवाई के बाद एक पक्ष के पिता और उसके दो पुत्रों को गैरइरादतन हत्या का दोषी पाया। जिन्हें आजीवन कारावास की सजा के साथ ही प्रत्येक पर 41 हजार पांच सौ रुपये अर्थदंड लगाया। एक आरोपी के किशोर होने के चलते उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। वहीं दूसरे पक्ष के तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। मामला कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र के कोईरियापार गांव का है।
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अभियोजन के अनुसार पुरानी रंजिश को लेकर 20 जुलाई 2005 की सुबह 6ः30 बजे दो पक्षों में मारपीट हुई। इसमें एक पक्ष के निरंजन की मौत हो गई। इस मामले में रामप्यारी देवी पत्नी स्व. निरंजन की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। इसमें केदार चौहान, राजेंद्र चौहान, रामचंद्र चौहान और रविंद्र चौहान को नामजद किया। इसमें निरंजन चौहान, परशुराम, मिश्री और अयोध्या को चोट आई। इलाज के दौरान निरंजन की मौत हो गई। वहीं दूसरे पक्ष की बदामी देवी पत्नी केदार की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। इसमें परशुराम, अयोध्या और मिश्री आदि को नामजद किया गया। इसमें केदार, गुड़िया, हेमंता, रामचंद्र और रविंद्र को चोट आई। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी नंदलाल भारती ने एक पक्ष से 7 और दूसरे पक्ष से 11 गवाहों को पेश किया। एक पक्ष से परशुराम आदि के अधिवक्ता मनोज कुमार पांडेय ने क्राॅस केस का हवाला देते हुए झूठा फंसाए जाने का आरोप लगाया। तो दूसरे पक्ष के अधिवक्ता ने भी क्राॅस केस का हवाला देते हुए झूठा फंसाए जाने का आरोप लगाया। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद एक पक्ष के परशुराम, अयोध्या और मिश्री को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। वहीं दूसरे पक्ष के केदार चौहान पुत्र हीरा, राजेंद्र चौहान और रामचंद्र चौहान पुत्रगण केदार चौहान को गैर इरादतन हत्या, मारपीट कर गंभीर चोटें पहुचांने, धमकी और हमले का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद सभी को गैर इरादतन हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा के साथ ही 25-25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
गंभीर चोटें पहुंचाने में 5-5 वर्ष का कठोर कारावास की सजा के साथ ही 5-5 हजार रुपये अर्थदंड, मारपीट के मामले में एक-एक वर्ष की सजा के साथ ही 1-1 हजार रुपये अर्थदंड, धमकी देने के मामले में 7-7 वर्ष की सजा के साथ ही 10-10 हजार रुपये अर्थदंड तथा हमला करने के मामले में 2-2 माह की सजा के साथ ही 5-5 सौ रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। गवाहों को कोर्ट में पेश कराने में पैरोकार आरक्षी अनुराग तिवारी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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