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लोगों की सेहत पर बुरा प्रभाव डाल रहा डीजे का तेज आवाज

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मऊ। जिले में खुलेआम मानकों की अनदेखी के कारण ध्वनि प्रदूषण का स्तर निरंतर बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। मानक के अनुसार दिन के समय 45 डेसीबल और रात के समय 35 डेसीबल तक की ध्वनि का मानक निर्धारित है। लेकिन लापरवाही के चलते इसका समुचित ढंग से पालन नहीं हो पा रहा है। आधुनिकता के दौर में डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग तेजी से किया जा रहा है। जो लोगों के लिए काफी खतरनाक साबित हो रहा है।
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ईएनटी सर्जन डॉ. आरआर चौहान ने बताया कि आज से काफी युवाओं में सुनने की शक्ति पर काफी प्रभाव पड़ा है। युवाओं द्वारा ईयर फोन का लगातार प्रयोग किया जाना भी खतरनाक साबित हो रहा है। रही सही कसर तेज आवाज में बजने वाले डीजे पूरी कर दे रही है। काफी संख्या में लोगों में सुनने की संख्या में कमी आ रही है। स्थिति यह है कि 20-25 डेसिबल की आवाज भी युवाओं और बच्चों तक में सुनने की समस्या आ रही है। लक्षण यह है कि धीरे-धीरे बोलने पर आवाज न समझ में आना। इस दशा में पहले ही सचेत हो जाना चाहिए। बहरेपन से बचने के लिए प्रेशर हार्न, डीजे तथा लाउडस्पीकर की तेज आवाज से दूर रहना चाहिए। चिकित्सकों का कहना है कि श्रवण में थोड़ी भी दिक्कत होने की दशा में तत्काल चिकित्सक के संपर्क करें।
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