मऊ। कोरोना संक्रमण के चलते पांच माह से बंद छठवीं से आठवीं कक्षा के विद्यालय मंगलवार से खुल गए। स्कूल खुलने के बाद एक बार फिर से रौनक लौट आई। स्कूल आने वाले सभी छात्र-छात्राओं को सैनिटाइजर से हाथ धुलवाकर अभिभावकों का सहमति-पत्र दिखाने के बाद मास्क अप में विद्यालयों में प्रवेश दिया गया। विद्यालय खुलने से छात्र छात्राएं उत्साहित नजर आए। पहले दिन अधिकांश विद्यालयों में लगभग 50 से 52 प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति रही। परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सातवीं तथा आठवीं की पुस्तक नहीं वितरित हो सकी है। ऐसे में बच्चों को बिन किताब के ही पढ़ाई करना पड़ा।
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग, सीबीएसई, माध्यमिक शिक्षा विभाग से संबद्ध दो हजार छठवीं से आठवीं तक के विद्यालयों में लगभग 2.30 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। कोरोना संक्रमण के चलते विद्यालय खुले तो थे। शिक्षक विद्यालय जाकर आनलाइन क्लास संचालित कर रहे थे। जबकि परिषदीय विद्यालयों में मुहल्ला क्लास संचालित हो रही थी। सरकार के फरमान पर मंगलवार से कोविड प्रोटोकाल के तहत छठवीं से आठवीं के विद्यालय खुले।
विद्यालय गेट पर ही छात्र छात्राओं को सैनिटाइजर से हाथ धुलवाकर मास्क अप में कक्षा में भेजा गया। इस दौरान महीनों बाद सभी ने एक दूसरे से हालचाल पूछा और पढ़ने के लिए अपनी-अपनी कक्षाओं की ओर बढ़ चले। स्कूल आने वाले छात्र मास्क लगाए हुए थे। कई परिषदीय विद्यालयों मेें कुछ बच्चे मास्क नहीं लगाकर आए थे। शिक्षकों ने मास्क उपलब्ध कराया। इस दौरान शिक्षकों ने कोर्स कवर करने के लिए दिशा निर्देश दिया।
क्षेत्र के खुरहट स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय मंगलवार को कोविड प्रोटोकाल के तहत खुला। बच्चों का सैनिटाइजर से हाथ धुलवाकर कक्षा में भेजा गया। पहले दिन 138 के सापेक्ष 50 बच्चों की उपस्थिति रही। आठवीं कक्षा की निशुल्क पाठ्यपुस्तक नहीं वितरित हो सकी है। ड्रेस का पैसा अभिभावकों के खाते में न आने से अधिकांश बच्चे घरेलू कपड़ों में ही विद्यालय आए।
शासन की तरफ से परिषदीय विद्यालयों में नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक तथा नि:शुल्क ड्रेस वितरित किया जाना है। छठवीं से आठवीं के विद्यालय खुल गए हैं, लेकिन परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सातवीं, आठवीं कक्षाओं की नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें नहीं आ पाई है। अभी तक लगभग 13 लाख के सापेक्ष आठ लाख निशुल्क पाठ्यपुस्तक ही आ पाई है। दो सेट नि:शुल्क ड्रेस के लिए धन बच्चों के अभिभावकों के खाते में शासन से भेजा जाना है, लेकिन अभी तक धन खाते में नहीं भेजा जा सका है। ऐसे में कुछ बच्चे बिना ड्रेस के आए। तो कुछ पिछले वर्ष वाला ड्रेस पहनकर आए। इस बाबत बीएसए डॉ. संतोष कुमार सिंह का कहना है कि निशुल्क पाठ्यपुस्तकों की खेप आ रही है। सत्यापन के बाद विद्यालयों में वितरित कराई जा रही है।