मऊ। ‘पुरस्कार ने कई गुना जिम्मेदारियां बढ़ा दी हैं। सिर्फ एक ही कोशिश रोजाना रहती है कि मेरा समय जाया न जाए। अपने छात्रों को ऐसे संवारू कि उनका भविष्य हमारे राष्ट्र की ठोस बुनियाद बनें।’ यह कहना था रविवार को महामहिम के हाथों राष्ट्रीय अध्यापक पुरस्कार लेकर घर वापस लौटे शिक्षक रामनिवास मौर्य का। श्री मौर्य रविवार को पत्नी केे साथ लिच्छवी ट्रेन से मऊ जंक्शन पर उतरे।
कोपागंज ब्लाक के लैरोदोनवार निवासी और प्राथमिक विद्यालय देईथान के सहायक अध्यापक रामनिवास ने अमर उजाला से कहा कि शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता है। हम ऐसी जगह हैं जहां से देश को बहुत कुछ दे सकते हैं। महामहिम के हाथों जो पुरस्कार मिला है उसने जिम्मेदारियों को कई गुना बढ़ा दिया है। सदैव यही कोशिश रहेगी कि मुझे मेरे छात्रों पर नाज हो और मेरे छात्रों को मुझको। सभी को धन्यवाद। इसके पूर्व स्टेशन पर पहुंचते ही शिक्षक शिवाकांत सिंह और जिला स्काउट कमिश्नर राकेश कुमार ने माला पहना कर श्री मौर्य का स्वागत किया और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर बालकृष्ण ठरड, देव प्रकाश राय, राकेश सिंह, रामनवल राही, जितेंद्र गोयल, आलोक मिश्र, उमाकांत यादव, डा. गिरीश पांडेय, प्रमोद राय आदि लोगों ने स्टेशन पर रामनिवास मौर्या का स्वागत करते हुए उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया। पति को मिले सम्मान को देख कर इशरावती देवी भी गदगद दिखी। दिल्ली से साथ ही वापस लौटी इशरावती ने बेहद सरल लहजे में कहा कि अच्छी मेहनत पर बड़े पीठ थपथपाएं तो अच्छा तो लगता ही है।