मथुरा। करीब पौने दो सौ साल पुरानी श्रीरामलीला आयोजन की परंपरा में इस बार भी महाविद्या के मैदान पर रावण दहन लीला नहीं होगी। लीला की परंपरा सिर्फ मसानी स्थित चित्रकूट पर चौपाई गायन से ही निभाई जाएगी। कोविड की बंदिशों के चलते जिला प्रशासन ने लीला मंचन के साथ रावण दहन की अनुमति प्रदान नहीं की है।
मथुरा में श्रीराम लीला के मंचन की परंपरा अंग्रेजी शासनकाल से चली आ रही है। कोविड के चलते पिछले साल लीला का मंचन नहीं किया गया था। इस बार भी यही स्थिति है। श्रीराम लीला सभा के तत्वावधान में लीला की परंपरा सिर्फ चौपाई गायन से निभाई जा रही है। इसी प्रक्रिया में दशहरा के मौके पर होने वाली रावण दहन की लीला का प्रदर्शन महाविद्या के मैदान नहीं होगा। सभा के संरक्षक मंडल के वरिष्ठ सदस्य गोपेश्वनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि प्रशासनिक अनुमति न मिलने के कारण इस बार भी रावण दहन नहीं होगा।
कुंभकरण-मेघनाद वध और सुलोचना सती लीला का हुआ चौपाई गायन
मथुरा। श्रीराम लीला मथुरा के तत्वावधान में चित्रकूट पर श्री रामचरित मानस की चौपाई गायन व वर्णन गणेश व्यास द्वारा किया गया। इसमें कुंभकरण-मेघनाद वध और सुलोचना सती लीला का चौपाई गायन किया गया। चौपाई गायन में बड़े ही अच्छे तरीके से व्यास जी ने इसका वर्णन किया।
सबरी लीला देख भावविभोर हुए दर्शक
मथुरा। श्री चतुर्वेदी रामलीला महासभा की नौ दिवसीय लीला में हनुमान मिलन, सबरी चरित्र एवं लंका दहन लीला का मंचन किया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि गोवर्धन विधायक कारिंदा सिंह ने प्रभु श्रीराम को माला पहनाकर आशीर्वाद लिया। कमेटी के पदाधिकारियों ने विधायक को सम्मानित किया।
चतुर्वेदी रामलीला महासभा के महामंत्री कमल चतुर्वेदी ने बताया कि रामलीला भव्य तरीके से की जा रही है। इसका प्रसारण लाइव भी कराया जा रहा है। कोषाध्यक्ष नीरज चतुर्वेदी ने बताया कि लीला में सबरी चरित्र हनुमान मिलन, बाली वध, लंका दहन लीला का मंचन किया गया। मीडिया प्रभारी श्याम मोनू चतुर्वेदी ने बताया कि दशहरा के दिन रावण वध लीला होगी। इसके बाद भरत मिलाप और राजगद्दी का मंचन किया जाएगा। संवाद
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रावण की पूजा शास्त्र संगत नहीं: राजेश पाठक
मथुरा। अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के ब्रज प्रांत महामंत्री एवं अंतरराष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद सदस्य राजेश पाठक ने कहा कि रावण की पूजा की नई परंपरा अनुचित और शास्त्र संगत नहीं है। रावण की पूजा को निषेध बताया है। उन्होंने कहा कि सनातन वैदिक धर्म में किसी की पूजा उसके कुल के जन्म से वैभव से नहीं की जा सकती है। पूजा हमेशा सदाचरण लोक कल्याणकारी कार्य एवं पवित्रता के पथ गामी परमार्थी व्यक्तित्व की की जा सकती है। रावण का व्यक्तित्व सदाचार के मापदंडों पर खरा नहीं है। रावण की पूजा की बात करने वाले लोगों को वाल्मीकि रामायण सहित अन्य शास्त्रों का अध्ययन करना चाहिए। राजेश पाठक ने कहा कि इस विषय पर शंकराचार्य उत्तराधिकारी अविमुक्तेश्वरानंद भी इस नई शुरूआत से सहमत नहीं है। संवाद