महावन के रमणरेती आश्रम में सोमवार को चार दिवसीय गुरु कार्ष्णि गोपाल जयंती महोत्सव शुरू हो गया। प्रवचनों में संतों ने ब्रज को भक्ति के जागरण का स्थान बताया और प्रभु मिलन के तरीके बताए।
सोमवार सुबह गोपाल जयंती महोत्सव की शुरुआत गोपाल विलास के पाठ से कार्ष्णि संतों ने की। संत ब्रजेश्वरानंद ने कहा कि प्रसन्न रहने का सबसे सुगम साधन है कि जो मिला है उसे प्रभु का प्रसाद मान लो।
भौतिक उपलब्धियों में प्रभु को न भूलें। संत गोविंद देव गिरी ने कहा कि भक्ति के बिना उपलब्धियां अधूरी हैं। भक्ति पूरी श्रद्धा व विनय के साथ होनी चाहिए। कर्म उपासना, चित्त की एकाग्रता मुक्ति के अलग-अलग सोपान हैं। जूना अखाड़ा हरिद्वार के संत महामंडलेश्वर अवधेशानंद ने कहा कि प्रभु की कृपा पाने के लिए व्यक्ति का चरित्र और व्यवहार अहम रोल निभाता है।
सत्संग इसमें अलग तत्व है। उसका एक नैसर्गिक स्वरूप है। ‘ब्रज’ की परिभाषा बताते हुए कहा कि ‘ब्रज’ भक्ति के जागरण का स्थान है। पूरे देश में जहां भक्ति जर्जर अवस्था में रहती है, वहीं ब्रज में आकर युवा हो जाती है। आगे कहा कि ब्रज की धरा उत्सवों की धरा है।
यहां निरंतर धार्मिक उत्सव होते हैं, रसोत्सव, मंगलोत्सव, आनंदोत्सव के नित नए धार्मिक कार्य होते रहते हैं। भक्ति का मर्म बताते हुए कहा कि भक्ति वह है जो खोई प्रसन्नता को वापस ले आए। कार्यक्रम में संत स्वामी ज्ञानानंद, राजेंद्र दास महाराज आदि संतों ने प्रवचन किए।
कार्ष्णि कलाप पत्रिका के विशेषांक का हुआ विमोचन
रमणरेती आश्रम की ओर से प्रकाशित होने वाली धार्मिक पत्रिका कार्ष्णि कलाप के 25वें वर्ष में प्रवेश करने पर उसका विशेषांक निकाला गया। रमणरेती के संत गुरु शरणानंद ने पत्रिका के विशेषांक का विमोचन किया। इसमें संत शरणानंद ने पत्रिका के संपादक मोहन स्वरूप भाटिया सहित 24 लोगों को सम्मानित किया।
मंदिर निर्माण के लिए तराशे जा रहे पत्थर: नृत्यगोपाल दास
मणिराम छावनी अयोध्या के महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में होगा। इसके लिए पत्थर तराशे जा रहे हैं। पत्थरों का तीन हिस्से का काम पूरा हो चुका है। कहा कि हिंदू जनता चाहती है कि राम मंदिर वहीं बने जहां रामलला विराजमान हैं।