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यमुना के डूब क्षेत्र में प्रतिबंधित हो निर्माण, घाटों का चाहिए संरक्षण

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मथुरा। यमुना नदी के प्रवाह को परिवर्तित करने और डूब क्षेत्र में निर्माण को लेकर सिंचाई विभाग और यमुना कार्य योजना के नोडल अधिकारी को ब्रज धरोहर संरक्षण समिति के पदाधिकारियों ने ज्ञापन दिया। इस दौरान पदाधिकारियों ने बताया कि जनपद पवित्र तीर्थ नगरी हैं, जिसका वर्णन वेद एवं पुराणों में भी हैं। मथुरा में 2 किमी के क्षेत्र में प्राचीन काल से 25 घाट बने हुए हैं। विगत वर्ष से यमुना के खादर क्षेत्र में प्राचीन घाटों को खोद कर उसके आगे मलवा कूड़े का भराव कर यमुना के प्रवाह को पुराने घाटों से दूर किया गया है।
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यहां यमुना मिशन संस्था की ओर से यह किया जा रहा है। खादर की जगहों पर बिना अनुमति के निर्माण किया जा रहा है। इतना ही नहीं यमुना के खादर क्षेत्र में फसली पट्टाधारियों ने भी भूमि को अवैध ढंग से बेच कर मकान एवं नए घाटों का निर्माण तक करा लिया है। इस पर संबंधित विभाग मौन हैं। अतिक्रमणकारियों का यह क्रम निरंतर जारी है, इसके दूरगामी घातक परिणाम संभावित हैं। समिति के कार्यकर्ताओं ने अवैध निर्माण को हटाने व यमुना के प्राकृतिक प्रवाह को पूर्ववत करने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया।
इसमें यह भी कहा है कि चक्रतीर्थ घाट, कृष्णगंगा घाट, सूर्य घाट, ध्रुव घाट, आदि की पुरानी सीढ़ियों को दबा कर प्राचीनता को खत्म किया जा रहा है। ज्ञापन देने में लोकतंत्र सेनानी विजय बहादुर सिंह , योगेश आवा, विश्वधर्म रक्षक दल के विजय चतुर्वेदी, डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. राकेश चतुर्वेदी, विजय अग्रवाल बंटा, नरेश शर्मा एवं अनिल चतुर्वेदी, धनेश दत्त चतुर्वेदी आदि उपस्थित थे।
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