महोबा/ बेलाताल। जनपद में पशुधन प्रबंधन एवं लाभकारी डेयरी व्यवसाय के अंतर्गत दुधारू पशुओं का प्रबंधन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें पशुओं का समय टीकाकरण कराने पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षण के अंतिंम दिन शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल में केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक मुकेश चंद ने अन्ना प्रथा के उन्मूलन में पशु प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को दुग्ध समितियां बनाकर रोजगार सृजन के बारे में बताया। केंद्र पर स्थापित पशुशाला मॉडल में अच्छी नस्ल की गायों साहीवाल, थारपारकर आदि को देखने हेतु कृषकों को आमंत्रित किया जो बुंदेलखंड की स्थिति में 10 से 12 किग्रा दूध दे रही हैं। उन्होंने दुधारू पशुओं को पालने हेतु हरा चारा प्रबंधन, उचित रखरखाव की तकनीकी जानकारी दी। गाय की स्थानीय नस्ल को सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान अथवा अच्छे नस्ल के सांड़ से गर्भाधान करने का सुझाव दिया।
कार्यक्रम में पशुपालन विभाग से विशेषज्ञ के रूप में पधारे डॉ. राम सिंह, पशु चिकित्साधिकारी, अजनर क्षेत्र द्वारा पशुओं में होने वाले विभिन्न रोगों में खुरपका-मुंहपका बीमारी के समय से टीके अवश्य लगवा लें। कोई अन्य बीमारी होने पर पशु चिकित्सालय से संपर्क करें और पशुओं को छुट्टा न छोड़े। बकरियों के मुंह में पड़ रहे छालों तथा पेट के कीड़ों एवं बीमारियों के बचाव के लिए समय पर दवाइयों का प्रयोग करें।
प्रशिक्षण में 40 प्रगतिशील पशुपालकों ने भाग लिया, जिसमें गोविंददास पाठक, परमानंद, प्रियांशु, पुष्पेंद्र, चंद्रप्रकाश आदि मौजूद रहे।
पोषक तत्वों से भरपूर है गाय का दूध
गृह वैज्ञानिक डा. अमृता सिंह ने प्रशिक्षण में बताया कि अन्ना प्रथा पर अंकुश लगाने हेतु गाय को बांधकर रखने एवं गाय के गोबर एवं मूत्र से नॉडेप कम्पोस्ट, केंचुआ खाद एवं जीवामृत बनाकर फसलों में छिड़कने की सलाह दी। मानव पोषण में दूध की उपयोगिता के बारे में बताया कि दूध पोषक तत्वों से भरपूर्ण एक संपूर्ण आहार है। जिसे सभी को प्रतिदिन अपने भोजन में सम्मिलित करना चाहिए। कार्यक्रम में केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. बृजेश पांडेय ने चारा फसलों की जानकारी देते हुए कहा कि एम.पी. चरी, लोबिया व बाजरा के हरे व सूखे चारे को दुधारू पशुओं को निर्धारित मात्रा में मिलाकर खिलाएं साथ ही निर्धारित मात्रा में दाना, खली नमक, खडिया इत्यादि देते रहें, स्वच्छ पानी पिलाए एवं नहलाएं।