महोबा। परिवहन निगम की खटारा बसों में यात्रियों का सफर सुरक्षित नहीं हैं। महोबा डिपों की अधिकांश बसों में सुरक्षित सफर की उम्मीद करना बेमानी है।
परिवहन निगम की बसों में हजारों लोग यात्रा कर रहे हैं लेकिन बसों में मूलभूत सुविधाएं गायब हैं। बसों के अंदर फर्स्ट एड बॉक्स शोपीस बने हुए हैं। जिसमें दवा मरहम सबकुछ गायब है। वहीं बसों में आग बुझाने के लिए लगे अग्निशमन यंत्र महज नाम के लिए लगे हैं। एक्सपायर हो चुके यंत्रों को बदला नहीं जा रहा है। जागरुकता के लिए लिखे हेल्पलाइन नंबर मिट गए हैं, कई बसों उन नंबरों के ऊपर पोस्टर चिपके हुए हैं जिससे लोगों वह नंबर नहीं दिख रहे हैं। लाखों रुपये की प्रतिदिन आय होेने के बाद भी व्यवस्था सुधर नहीं रही हैं। बसों के चालक और परिचालकों का कहना है कि अलग-अलग बसें दे दी जाती हैं। जिम्मेदार अधिकारी बसों की स्थिति से अवगत हैं। कोरोना संक्रमण को लेकर एक ओर सरकार द्वारा तैयारियों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं लेकिन डिपो में कोरोना से बचाव को लेकर मॉस्क और सैनिटाइजर की व्यवस्था नहीं हैं।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंध के अनुसार डिपो की प्रतिदिन की आय करीब 12 लाख रुपये है।
इन बसों के पूरी हो चुकी है मियाद
डिपो की ऐसी बसें जो 12 लाख से किमी. से अधिक और 10 साल की आयु पूरी कर चुकी हैं ऐसी बसें रूट पर दौड़ रही हैं। जिसमें यूपी 93 टी 0713 महोबा से कानपुर, यूपी 95 बी 2220 महोबा से झांसी, यूपी 15 एटी 4096 महोबा से झांसी, यूपी 95 बी 2389 महोबा से राठ, यूपी 95 बी 2377, यूपी 95 बी 2681 महोबा से बांदा, यूपी 95 बी 3372 महोबा से राठ के लिए दौड़ रही हैं। यूपी 95 बी 3372 कोर्ट केस की वजह से सरेंडर है।
केस-1 20 अगस्त को महोबा से मुस्करा जा रही महोबा डिपो की बस खरेला बस स्टैंड के आगे खराब हो गई है। धक्का मारने के बाद भी बस स्टार्ट नहीं हो सकी। जिससे परेशान यात्रियों ने हंगामा काटा।
केस-2 29 अगस्त को महोबा से झांसी जा रही डिपो की बस स्टैंड तिलेगा के पास खराब हो गई है। जिससे या त्री परेशान रहे। मजबूरन यात्रियों को निजी वाहन का सहारा लेना पड़ा।
कई बसों की मियाद पूरी हो चुकी है उनको लेकर शासन को पत्र लिखा जा चुका है। जल्द ही डिपो को नई बसें मिलेंगी। वहीं बसों में जो कमियां है उनको दूर किया जाएगा।
हेमंत मिश्रा, एआरएम
सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय में यूपीएसआरटीसी की 105 बसें दर्ज हैं जिसमें 95 बसों की फिटनेस हैं। डिपो की कई बसों में स्पीड लिमिट डिवाइस (एसएलडी) नहीं लगी है। अनफिट वाहनों से हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है।
रोहित सिंह, आरआई,
क्या बोले यात्री
-सचिन का कहना है कि डिपो की बसें खस्ताहाल होने से बीच रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। जिससे फायदा निजी वाहन उठाते हैं। डिपों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करनी चाहिए जिससे यात्री सुरक्षित तरीके सफर कर सकें।
-राज पटेल का कहना है कि डिपो की बसों का किराया तो समय-समय पर बढ़ता है लेकिन सुविधाएं नहीं है। बसों में चिकित्सा की सुविधा नहीं हैं, गंदगी से लोग परेशान हैं।