आंदोलन में दिवंगत किसानों को दी गई श्रद्धांजलि
महराजगंज। कृषि कानून के विरोध में लगभग एक साल चले आंदोलन में मारे गए किसानों को कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि दी गई। सरकार को किसानों के आगे झुकना ही पड़ा। किसान अपने हित के लिए आंदोलन की राह पर डटे रहे। चुनाव करीब आता देख सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है।
यह कहना है कि कांग्रेस के प्रदेश सचिव दिलीप निषाद का। शनिवार की शाम नगर के सक्सेना चौक पर कार्यकर्ताओं के साथ कैंडल जलाकर उन्होंने आंदोलन में दिवंगत किसानों की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। कहा कि सरकार केवल अपने उद्योगपति मित्रों को लाभ देने के लिए तीन कृषि कानून लाई थी। लगभग 700 किसानों की मौत के बाद सरकार को समझ में आया कि कानून ठीक नहीं है। इस अवसर पर अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के चेयरमैन आलोक प्रसाद, गोपाल शाही, अकील अहमद, नूर आलम, पूर्णमासी यादव, कपिल देव शुक्ला, रमाकांत त्रिपाठी, अकरम सलमानी, संदीप तिवारी, अशोक महेशिया आदि मौजूद रहे।
भाकपा माले ने निकाला विजय जुलूस
निचलौल। सरकार की ओर से कृषि कानूनों की वापसी की खुशी में शनिवार को भाकपा माले के कार्यकर्ताओं ने पार्टी के जिला सचिव कामरेड हरिश्चंद्र जायसवाल के नेतृत्व में विजय जुलूस निकाला और सभा की। हरिश्चंद्र ने कहा कि देश के कोने-कोने में चल रहे आंदोलनों के परिणाम स्वरूप केंद्र की सरकार को मजबूरन नए कृषि कानूनों की वापसी का फैसला लेना पड़ा है। यह ऐतिहासिक जीत है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों को फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की गारंटी दे। इस अवसर पर कामरेड महेश गुप्ता, दिनेश वर्मा, सुग्रीव चौहान, ललिता निषाद, जमुना भारती, संजय निषाद, राहुल अग्रहरि, नागेंद्र, रामायण आदि मौजूद रहे। संवाद