पांच साल बाद भी सोहगीबरवां में नहीं बन पाया 30 बेड का अस्पताल
12 हजार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की आस अधूरी
महराजगंज। सोहगीबरवां में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए बनवाया जा रहा 30 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पांच वर्ष बाद भी अधूरा है। करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण कार्य दिसंबर 2016 में शुरू हुआ था। इसे तीन साल में पूरा करना था, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता और कार्यदायी संस्था की मनमानी से पांच साल बीत जाने के बाद भी सीएचसी का निर्माण अधर में लटका है। धीरे-धीरे भवन खंडहर होता जा रहा है।
सोहगीबरवां के पूर्व ग्राम प्रधान विनय सिंह ने बताया कि सपा शासनकाल में मुसहर बस्ती सोहगीबरवां, भोतहा, शिकारपुर और इनके टोले बाबू टोला, नौका टोला, मुजा टोला, पश्चिम टोला, धर्मपुर, मटियरवा, खुटहवा, दौंनहवा के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सीएचसी का प्रस्ताव पास हुआ था। दिसंबर 2016 से कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड ने करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण कार्य कराया, लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका।
ग्रामीण नर्वदेश्वर पटेल ने कहा कि निर्माण कार्य शुरू होने पर विभाग ने आश्वासन दिया था तीन साल के अंदर अस्पताल का निर्माण कराकर चालू कर दिया जाएगा। पांच वर्ष बाद भी अस्पताल चालू नहीं हो सका है। विनोद श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश में भाजप सरकार बनने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लोरिक सहानी ने कहा कि जिम्मेदारों के ध्यान न देने के चलते अधूरे अस्पताल के चारों तरफ झाड़ियां उग आई हैं। भवन खंडहर के रूप में तब्दील हो रही है।
सीएमओ डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि अभी अस्पताल का निर्माण कार्य अधूरा है। कार्यदायी संस्था जब निर्माण कार्य पूरा कर लेगी, तब विभाग हैंडओवर लेगा। निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
इलाज के लिए बिहार जाते हैं लोग
सोहगीबरवां के अयूब अंसारी, राजू ने कहा कि जिले के सोहगीबरवां, भोतहा और शिकारपुर दो तरफ से बहने वाली नदियों और घने जंगलों से घिरा है। यहां के लोग इलाज के लिए मिलों की दूरी तय कर बिहार के बगहा, बाल्मीकि नगर और भैंसा लोटन स्थित बड़े अस्पतालों में जाते हैं। क्योंकि यहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए इंतजाम नहीं है।
आयुर्वेदिक अस्पताल में चिकित्सक नहीं
ग्रामीण शाकिर, रामचंद्र ने कहा कि यहां आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण कराया गया था। यहां संसाधनों की कमी है। चिकित्सक की तैनाती भी नहीं हुई। वार्ड ब्वॉय के सहारे अस्पताल संचालित हो रहा हैै।
‘कार्यदायी संस्था को जल्द भेजी जाएगी रकम’
स्वास्थ्य विभाग के जूनियर इंजीनियर आरएन सिंह ने बताया कि रकम के अभाव निर्माण कार्य रुका था। जल्द ही निर्माण कार्य के लिए कार्यदायी संस्था को बची रकम उपलब्ध करा दी जाएगी। तीन महीने के अंदर अधूरे अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद है।