ललितपुर-नाराहट। ग्रामीण क्षेत्र को बाशिंदे मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। सड़क और पेयजल की समस्या तो आम हो गई लेकिन जिला मुख्यालय तक समय पर आने जाने के लिए भी उन्हें निजी संसाधनों का इस्तेमाल करने पर विवश होना पड़ रहा है। आलम यह है कि ललितपुर से नाराहट होती हुई जामुनी बांध जाने के लिए रोडवेज बस न होने से निजी बस संचालक मनमानी कर रहे हैं। जिला मुख्यालय से नाराहट आने के लिए 40 किमी का फासला दो घंटे से अधिक समय तय करने के बाद दोपहर दो बजे के बाद पहली बस पहुंच पा रही है जबकि नाराहट से शाम चार बजे के बाद कोई बस जिला मुख्यालय के लिए नहीं है। स्थानीय लोगों ने क्षेत्रीय विधायक को समस्या से अवगत कराया लेकिन कोई राहत नहीं मिली।
जिला मुख्यालय से प्रतिदिन आने जाने वाले व्यापारी व नौकरी पेशा के अलावा डिग्री कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इसी के चलते क्षेत्र की अधिकांश छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित हो रहीं हैं। सुबह जिला मुख्यालय आने जाने के लिए कोई बस नहीं है। पहली बस यहां दो बजे पहुंचती है जबकि नाराहट से अंतिम बस शाम चार बजे जिला मुख्यालय के लिए चली जाती है। ऐसे में शाम को घर आने वाले कारोबारियों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। बताते हैं कि जामुनी बांध से गौना, नाराहट, दिगवार, डोगरा, गुणा खिरिया, चादोंरा, गुरयाना, पटना, पारोल, वरोदिया आदि से होते हुए क्षेत्र लोग आए दिन जिला मुख्यालय तक आते जाते हैं। इन गांवों की करीब 50 हजार की आबादी बसें समय से न चलने के कारण प्रभावित हो रही हैं।
तो दबंगई के चलते बंद हो गईं रोडवेज बसें
स्थानीय लोगों के मुताबिक सपा सरकार के कार्यकाल में दो लोहिया बसों का संचालन हुआ था। दोनों बसे जामुनी बांध से झांसी तक जाती थीं। पहली बस सुबह ललितपुर से नाराहट आठ बजे चलती थी और शाम को छह बजे नाराहट से झांसी दूसरी बस चलती थी लेकिन निजी बस संचालकों की दादागिरी के कारण दोनों बसें बंद हो गईं। जामुनी से झांसी जाने के लिए क्षेत्र वासियों का पैसा बर्बाद होता है और कई बसें बदलकर यात्रा करनी पड़ती है।
कोर्ट आने वाले वादकरियों को होती परेशानी
सबसे ज्यादा परेशानी उन वादकारियों को होती है जिन्हें निर्धारित समय पर न्यायालय पहुंचना होता है। उन्हें निजी संसाधनों से ही जाना और आना पड़ता है अथवा एक दिन पहले ही जिला मुख्यालय आकर रिश्तेदारी में रुकना पड़ता है। तब वह समय पर कोर्ट में पहुंच पाते हैं।
कस्बे में दूध डेरी का संचालन करना मुश्किल हो रहा है। कल से सीजन शुरू होने के कारण दूध लाने के लिए निजी वाहन लेकर आना पड़ेगा। सुबह के समय एक बस जरूर चलनी चाहिए। राजेंद्र कुशवाहा, डेयरी संचालक
बसों का संचालन समय पर न होने से काफी दिक्कतें आ रही हैं। देर से आने के साथ ही जिला मुख्यालय से नाराहट तक 60 रुपये किराया लेते हैं। यह काफी अधिक है। इससे लोगों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। क्रश कुशवाहा
जामुनी बांध से झांसी तक सीधी बस जाती थी लेकिन अब तो निजी बसें ही यहां से ललितपुर तक जाती है, किराया भी अधिक लिया जाता है। सुबह के समय एक बस चलना चाहिए। इससे आसानी होगी। बाबू लाल वर्मा, सेवानिवृत्त शिक्षक