रेलवे क्रासिंग के बंद फाटक के नीचे से बाइक निकालकर ले जाता पुलिस कर्मी व अन्य
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जाखलौन। ग्रामीण क्षेत्रों में दोपहिया वाहनों का चालान कर किसानों का शोषण करने का आरोप किसान नेता रंजीत यादव ने लगाया है। उन्होंने कहा कि कुदरत की मार से बेहाल किसानों की बाइकों का चालान कर आर्थिक शोषण किया जा रहा है यदि इसे न रोका गया तो आंदोलन करने पर बाध्य होंगे।
किसान नेता का कहना है कि आम आदमी या किसान का चालान कर दिया जाता लेकिन यही काम कोई पुलिस कर्मी करता तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि किसानों को खेती किसानी के समय में पुलिस द्वारा दो पहिया वाहन का चालान कर उन्हें जानबूझकर परेशान कर रही है। खेती के समय अचानक डीजल अथवा कल पुर्जे लेने के लिए किसान खेत से सीधे कस्बा अथवा नगर सीमा में आ जाता है तो 500 से 6000 रुपये तक का चालान कर दिया जाता है। जबकि नगर में पुलिसकर्मियों सहित बड़ी संख्या में लोग यातायात नियमों का उल्लंघन करते हुए देखे जा सकते हैं। किसान कोरोना, अतिवृष्टि सहित विभिन्न आपदाओं से किसान बुरी तरह टूट चुका हैं ऐसे में पुलिस की चालान कार्रवाई अमानवीय है। नगर में कई राजनीतिक प्रभावशाली लोगों के दो पहिया और चार पहिया वाहन बिना नंबर प्लेट और नो एंट्री में फर्राटे लेते हुए देखे जा सकते हैं। कई संगठनों के विरोध और शिकायतों के बाद भी यदि प्रशासन ने वाहन चेकिंग के नाम पर किसानों के उत्पीड़न पर रोक नहीं लगाई तो भारतीय किसान यूनियन आंदोलन करने को विवश होगा।