ललितपुर। कृषि विज्ञान केेंद्र की गृह वैज्ञानिक डॉ. सरिता देवी ने कहा कि महिला किसान सामाजिक पहचान बनाएं। उन्होंने कहा कि कृषि अर्थव्यवस्था में बिना महिलाओं के विकास संभव नहीं है। ऐसे में उन्हें समाज में बराबर की भागीदारी मिलनी चाहिए, जिससे उनके काम की पहचान हो। यह बात उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र खिरियामिश्र में आयोजित महिला किसान दिवस में कही।
शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. सरिता देवी ने कहा कि राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाने का उद्देश्य है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहां की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर आधारित है, उनकी जीविका का मुख्य आधार कृषि है। ऐसे में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को बढ़ाया जाए। कृषि में 80 प्रतिशत कार्य महिलाओं द्वारा किए जाते हैं, लेकिन उन्हें किसान के रूप में पहचान नहीं मिलती है। खेती, पशुपालन, घर की देखरेख, बच्चों का पालन पोषण आदि कार्य महिलाओं द्वारा किए जाते हैं। इसके बाद भी किसी का ध्यान नहीं जाता है। उन्हें खेती की जमीन में मालिकाना हक नहीं मिलता है। किसान के रूप में उनकी पहचान नहीं होती है। महिलाओं को न तो किसान के रूप में पहचान मिलती है और न ही सामाजिक रूप से। महिलाएं आगे आएं और अपनी स्वयं की पहचान बनाएं। उनके बिना कृषि अर्थव्यवस्था में विकास करना संभव नहीं है। ऐसे में उन्हें समाज में बराबर की भागीदारी मिलनी चाहिए, जिससे उनके काम की पहचान हो। केंद्र की उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. अर्चना दीक्षित ने महिलाओं को सब्जी की खेती करने के लिए प्रेरित किया, जिससे वह अपनी आय अर्जित कर सकें। डॉ. मारूफ अहमद वैज्ञानिक पशुपालन द्वारा महिलाओं को पशुपालन व्यवसाय की जानकारी दी। अंत में तीन महिला किसानों को सम्मानित किया गया, जो पशुपालन व गृहवाटिका के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रहीं हैं। अजब देवी को पशुपालन करने के लिए सम्मानित किया गया। बसंती व मंजू को घरेलू स्तर पर गृहवाटिका लगाने के लिए सम्मानित किया गया। इन महिलाओं को देखकर अन्य महिलाएं भी अपने घर पर गृहवाटिका लगा रहीं हैं। महिला किसान दिवस पर 40 महिलाएं मौजूद रहीं।