ललितपुर। जिलाधिकारी ने मनरेगा कार्यों के निरीक्षण के दौरान ग्राम झरकौन में धोखाधड़ी का मामला पकड़ा था। इस मामले में अब ग्राम प्रधान, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा, ग्राम रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक एवं लेखाकार के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
यह मनरेगा के तहत मस्टर रोल में अधिक श्रमिकों के नाम लिखकर नाला सफाई कार्य करवाकर कूटरचित योजना से अधिक धन अर्जित करने का मामला था। ब्लॉक बिरधा के खंड विकास अधिकारी आलोक कुमार ने कोतवाली पुलिस को दी तहरीर में बताया कि डीएम ने नौ जून को ग्राम पंचायत झरकौन का निरीक्षण किया गया है, जिसमें रमेश के खेत से मोटे की ओर नाला सफाई कार्य पर मस्टर रोल जारी था, इसमें कुल 28 श्रमिक कार्य करते हुए पाए गए थे। उनमें से केवल 18 श्रमिक ही मस्टर रोल पर अंकित थे, शेष दस श्रमिक सोनू, किन्नेर, शीला, मानकुंवर, जलेबी, निर्मल, आनंदी, तोर, राधारानी एवं सुनीता के नाम मस्टर रोल में अंकित नहीं थे।
इसके अतिरिक्त जिनका नाम मस्टर रोल में अंकित था, उनमें सविता, रामकुमार, बाबूलाल, राजबती, लक्ष्मण, श्यामादेवी, मानकुंवर मौके पर उपस्थित नहीं हुई, इसके बावजूद मस्टर रोल पर इनकी हाजिरी भरकर इनका भुगतान किया गया है। निरीक्षण के समय मस्टर रोल की ओरिजनल प्रति जिलाधिकारी के पास थी, लेकिन कूटरचित योजना बनाकर दूसरी प्रति निर्गत करवाते हुए अनुपस्थित श्रमिकों की हाजिरी भरकर ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, ग्राम रोजगार सेवक, व तकनीकी सहायक के द्वारा भुगतान की संस्तुति की गई है।
इनमें ग्राम प्रधान झरकौन जगदीश सिंह, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा उपेंद्र शर्मा, लेखाकार बिरधा घनश्याम वर्मा, तकनीकी सहायक रजनीश गिरी, ग्राम रोजगार सेवक निहाल सिंह दोषी पाए गए हैं। कोतवाली पुलिस ने मामले में पुलिस अधीक्षक के आदेश पर खंड विकास अधिकारी की तहरीर के आधार पर सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है।