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Lakhimpur Election Seat Result: आठ विधानसभा सीटों पर 65 प्रत्याशियों के भाग्य का आज खुलेगा पिटारा

Thu, 10 Mar 2022 10:39 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
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प्रतीकात्मक । - फोटो : ANI
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लखीमपुर खीरी। जिले में चौथे चरण में 23 फरवरी को हुए मतदान के बाद आज बृहस्पतिवार को आठों विधानसभा सीटों के नतीजे आएंगे। आठ विधानसभा सीटों पर दावेदारी करने वाले 65 प्रत्याशियों में किसके सिर विधायकी का ताज सजता है, इसका फैसला बृहस्पतिवार की दोपहर के बाद तक हो जाएगा। पिछले चुनाव में भाजपा ने जहां आठों सीटें जीतकर जिले में इतिहास रच दिया था, वहीं इस बार उसे अपना सिंहासन बचाए रखने की चिंता सता रही है। हालांकि, एग्जिट पोल में भाजपा को मिलती बढ़त से भाजपा से जुड़े नेता और कार्यकर्ता उत्साहित जरूर हैं, लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी सपा भी आठों सीटें जीतने का दम भर रही है।
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चुनाव के दिन कमोबेश हर सीट पर मुख्य रूप से सपा और भाजपा की ही टक्कर देखने को मिली थी। वहीं, बसपा आठ में पांच सीटें जीतने का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस खुद को सम्मानजनक अवस्था में बताते हुए जीत की बात कह रही है।

जिले में चौथे चरण में 23 फरवरी को हुए मतदान में खूब वोट बरसे। पिछली बार की तरह इस बार भी यहां औसत मत प्रतिशत करीब-करीब बराबर रहा है। पिछली बार जहां 68.60 फीसदी मतदान हुआ था वहीं इस बार 68.11 फीसदी मतदान हुआ है। यानी पिछले चुनाव के मुकाबले मात्र 0.49 फीसदी का ही मामूली अंतर रहा। यहां बता दें कि जिले के 28.07 लाख मतदाताओं में 14 लाख 97 हजार पुरुष और 13 लाख 9 हजार 894 महिला और 111 थर्ड जेंडर थे।
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चुनाव में ज्यादातर जगहों पर बहुसंख्यक वोट भी एकजुट होते आए थे नजर
इस बार के चुनाव में किसी पार्टी के पक्ष में लहर न होने के बावजूद मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया, जिसकी तस्दीक 68 प्रतिशत से ज्यादा मतदान से होती है। जिले में मतदान के दौरान ध्रुवीकरण का साफ असर दिखा था, जिससे ज्यादातर जगहों पर बहुसंख्यक वोट भी एकजुट होते नजर आए थे। उधर, कई विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं ने स्थानीय उम्मीदवार को पसंद न करने के बावजूद अपनी पसंद की पार्टी को वोट दिया।

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खास बात यह रही कि इस बार के चुनाव में मुस्लिम वोट का बंटवारा नहीं दिखा और ज्यादातर लोगों ने सपा के पक्ष में वोट करने की बात कही, जिससे बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच मुख्य मुकाबला सपा और भाजपा के बीच ही दिखा।


भाजपा और सपा की लड़ाई में बसपा ने बिगाड़े समीकरण
लखीमपुर खीरी। आठों विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा 12 प्रत्याशी इस सदर सीट से विधायकी के दावेदार हैं, लेकिन जातीय समीकरण के हिसाब से मुख्य रूप से सपा के उत्कर्ष वर्मा और भाजपा के योगेश वर्मा के बीच टक्कर बीच टक्कर देखने को मिली , जिसमें बसपा के मोहन बाजपेई ने वोटों की सेंधमारी की।
उधर, कांग्रेस के डॉ. रविशंकर त्रिवेदी भी ब्राह्मण वोटों में सेंधमारी करते दिखे थे, जिससे यहां मामला त्रिकोणीय था। हालांकि, चुनाव बाद यहां के मतदाताओं ने बताया कि उन्होंने स्थानीय प्रत्याशी को नजरअंदाज कर सीएम योगी और मोदी के चेहरे पर वोट किया है, जबकि मुस्लिम मतदाताओं ने सपा के पक्ष में मतदान किया।
सपा का गढ़ मानी जाने वाली सदर विधानसभा में पिछली बार भाजपा के प्रत्याशी योगेश वर्मा ने जीत हासिल की थी। पिछले चुनाव में भाजपा के योगेश वर्मा को 122677 वोट, जबकि दूसरे नंबर पर रहे सपा के उत्कर्ष वर्मा को 84929 वोट मिले थे। इस बार भी मुकाबला इन्हीं दोनों के बीच में है, हालांकि जातीय समीकरण के आधार पर बसपा ने सपा और भाजपा दोनों में सेंधमारी की है, जिससे जीत का अंतर काफी कम हो सकता है। पिछली बार यहां जहां 64.72 फीसदी मतदान हुआ था वहीं इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 65.38 फीसदी हो गया है।
उधर, भाजपा प्रत्याशी योगेश वर्मा ने जहां इस बार योगी और मोदी के चेहरे पर बड़े अंतर से डेढ़ लाख वोट पाकर बड़ी जीत दोहराने का दावा किया। वहीं, सपा प्रत्याशी उत्कर्ष वर्मा का कहना है कि महंगाई, बेरोजगारी, आवारा पशु आदि बड़े मुद्दों पर जनता ने उन्हें वोट किया है और मुस्लिम समुदाय का पूरा पूरा वोट मिला है। कांग्रेस डॉ. रविशंकर ने भी किसान और प्रतिज्ञा पत्र के मुद्दे पर अपनी ही जीत का दावा किया, जबकि बसपा के मोहन बाजपेई का कहना है कि ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम समेत हर वर्ग का वोट मिला है, इसलिये जीत सुनिश्चित है।

श्रीनगर (सु) विधानसभा में सबसे ज्यादा वोटिंग, टक्कर सपा भाजपा में
लखीमपुर खीरी। श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र में आठों विधानसभा सीटों के मुकाबले इस बार भी सबसे ज्यादा 71.59 प्रतिशत वोट पड़े। हालांकि, यह मतदान प्रतिशत पिछले साल के मुकाबले 0.61 फीसदी कम है। पिछले चुनाव में यहां 72.20 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, जो कि सबसे ज्यादा थी। वोटिंग प्रतिशत में मामूली फर्क से यहां भी सपा-भाजपा के बीच टक्कर है।
वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा की मंजू त्यागी 112941 वोट पाकर विजयी रही थीं, जबकि समाजवादी पार्टी की मीरा बानो 58002 वोट पाकर रनरअप रही थीं। इस बार मीरा बानो बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। सपा के रामसरन और भाजपा की मंजू त्यागी के इस बार रोचक मुकाबला दिखाई दिया। मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
भाजपा प्रत्याशी मंजू त्यागी बढ़े मतदान प्रतिशत व योगी की रैली की वजह से अपनी जीत पक्की मान रही हैं, जबकि सपा प्रत्याशी रामसरन मुस्लिम बूथों पर सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत होने की वजह से अपनी जीत सुनिश्चित मान रहे हैं, जबकि बसपा की मीरा बानों बसपा का कैडर और मुस्लिम वोट की लामबंदी कर अपनी जीत तय मान रही हैं। उधर, कांग्रेस प्रत्याशी चांदनी किसान और सभी लोगों का वोट मिलने का दावा कर अपनी जीत सुनिश्चित मान रही हैं।

धौरहरा विधानसभा
बसपा ने काटे भाजपा के वोट, सपा और भाजपा में मुकाबला
धौरहरा। धौरहरा विधानसभा सीट पर इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा मतदान हुआ है। पिछली बार यहां जहां 68.56 फीसदी मतदान हुआ था, वहीं इस बार यह प्रतिशत बढ़कर 68.90 हो गया है। ध्रुवीकरण और जातीय समीकरण का भी यहां असर दिखा है, जिससे सपा और भाजपा में कांटे की टक्कर है।
पिछले चुनाव में यहां भाजपा के बाला प्रसाद अवस्थी 79683, जबकि दूसरे नंबर पर रहे सपा के मरहूम यशपाल चौधरी को 76214 वोट मिले थे। इस बार बाला प्रसाद बेटे को टिकट न मिलने पर सपा में चले गए, लेकिन वहां भी दाल नहीं गली तो फिर भाजपा में लौट आए। इस बार भाजपा ने विनोद शंकर अवस्थी को मैदान में उतारा तो उन्हें इस बार मरहूम यशपाल चौधरी के बेटे वरुण चौधरी टक्कर देते नजर आ रहे हैं। भाजपा में रहे और टिकट न मिलने से बसपा में गए आनंद मोहन प्रत्याशी ने भी ब्राह्मण वोट काटकर भाजपा को नुकसान किया। उधर, ध्रुवीकरण का भी असर दिखा। मुस्लिम वोट सपा के खाते में गया, जिससे सपा और भाजपा के बीच सीधी टक्कर नजर आई।
भाजपा के विनोद शंकर अवस्थी जहां एग्जिट पोल के नतीजों के बाद अपनी जीत के प्रति आश्वस्त होकर पार्टी के विकास की लाइन पर जीत पक्की बता रहे हैं, वहीं सपा के वरुण चौधरी का कहना है कि जाति धर्म से ऊपर उठकर सभी वर्गों के वोट मिले हैं। 10 मार्च को वह जीत का सेहरा बांधकर धौरहरा आएंगे। उधर, बसपा के आनंद मोहन त्रिवेदी भी जीत के प्रति आश्वस्त होकर लड़ाई जारी रखने की बात कह रहे हैं, जबकि, कांग्रेस की जितेंद्री देवी ने भी खुद को सम्मानजनक लड़ाई में बताया है।

गोला विधानसभा में
ध्रुवीकरण का साफ असर, सपा और भाजपा में कांटे की टक्कर
गोला गोकर्णनाथ। गोला विधानसभा क्षेत्र में इस बार का चुनाव जातीय संघर्ष और ध्रुवीकरण में फंसा दिखा। मुख्य रूप से मुकाबला भाजपा और सपा के बीच में ही रहा। यहां ब्राह्मण, कुर्मी, दलित वोट बंटता नजर आया, वहीं मुस्लिम मतदाताओं ने एकजुटता दिखाई। हालांकि, कुछ जगह भितरघात भी हुआ, जिसका असर चुनाव परिणाम पर साफ देखने को मिलेगा।
गोला विधानसभा में इस बार कुल 65.62 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 2.78 फीसदी कम है। पिछले चुनाव में विजयी रहे भाजपा के अरविंद गिरि को जहां 122497 मत मिले थे, वहीं दूसरे नंबर पर रहे सपा के विनय तिवारी को 67480 वोटों पर संतोष करना पड़ा। इस बार फिर मुकाबले में भाजपा के अरविंद गिरि और सपा के विनय तिवारी आमने-सामने हैं।
गोला में जातीय समीकरण के आधार पर निर्णायक माना जाने वाला ब्राह्मण, कुर्मी मतदाता बंटा नजर आया, तो वहीं बसपा का कोर वोटर दलित भी बिखरा हुआ नजर आया। हालांकि, अल्पसंख्यक मतदाताओं ने खुलकर बोलने की बजाय धड़ल्ले से वोटिंग की।
भाजपा प्रत्याशी अरविंद गिरि ने एक बार फिर से जीत का दावा करते हुए कहा कि उन्हें सभी वर्गों का वोट मिला है उनकी जीत सुनिश्चित है। एग्जिट पोल भी इसकी तस्दीक कर रहे हैं, जबकि सपा के विनय तिवारी का कहना है कि जनता ने इस बार महंगाई, बेरोजगारी से नाराज होकर सपा के पक्ष में मतदान किया है। जीत के प्रति वह पूरी तरह आश्वस्त हैं। वहीं, कांग्रेस के प्रहलाद पटेल का कहना है कि किसानों और नौजवानों का समर्थन है। शासन सत्ता के दबाव में चुनाव हुआ है, जो फैसला होगा स्वीकार है। परिणाम के बाद से ही 2024 की तैयारियों में लगेंगे, जबकि बसपा प्रत्याशी शिखा अशोक कनौजिया का कहना है कि 70 से 80 फीसदी दलित वोट मिला है, इसके अलावा पिछड़ा और सर्व समाज भी साथ है। जीत सुनिश्चित है।

मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र
ध्रुवीकरण का दिखा साफ असर, यहां भी सपा और भाजपा आमने-सामने
मोहम्मदी। विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दौरान जो रुझान देखने को मिले उससे भाजपा और सपा के बीच ही कांटे की टक्कर मानी जा रही है। मुस्लिम बहुल इलाकों में सरपट साइकिल दौड़ी, तो वहीं अन्य क्षेत्र में कमल खिला। हालांकि यहां भी ध्रुवीकरण की स्थिति दिखने को मिली। सपा का दावा है कि उसे मुस्लिम बहुल इलाकों में 82 प्रतिशत तक वोट मिले।
मोहम्मदी विधानसभा सीट पर 2017 में भाजपा के लोकेंद्र प्रताप सिंह को 93000 मत मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के संजय शर्मा को 59082 वोट मिले थे। इस बार मोहम्मदी में पिछले चुनाव के मुकाबले वोट प्रतिशत कम रहा है। पिछले चुनाव में मोहम्मदी में मतदान प्रतिशत 69.43 था, जो कि इस बार घटकर 68.68 रह गया है।
एग्जिट पोल के नतीजों से उत्साहित भाजपा के लोकेंद्र प्रताप सिंह जहां इस बार फिर अपनी जीत दोहराने का दावा कर रहे हैं, वहीं सपा के दाउद अहमद का दावा है कि जमीन पर सिर्फ समाजवादी पार्टी लड़ रही थी और सपा को पूर्ण बहुमत मिलेगा। वहीं, बसपा प्रत्याशी शकील सिद्दीकी का कहना है कि सभी वर्गों का वोट मिला है, इसलिये जीत पक्की है। उधर, कांग्रेस की रितु सिंह का कहना है कि पसगवां कांड की पीड़िता होने के कारण सहानुभूति और कांग्रेस के कैडर वोटों के साथ उनकी जीत पक्की है, एग्जिट पोल के नतीजे गलत हैं।

कस्ता (सु) विधानसभा क्षेत्र
मतदान प्रतिशत में कमी के बावजूद मुकाबला सपा और भाजपा के ही मध्य
मितौली। कस्ता (सु) विधानसभा क्षेत्र में मुख्य रूप से पिछली बार की तरह ही दोनों प्रत्याशी आमने-सामने हैं, मुकाबला सपा और भाजपा के बीच ही है। मतदान प्रतिशत में भी इस बार मामूली कमी देखी जा रही है। पिछली बार यहां जहां 70.03 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, वहीं इस बार 0.71 फीसदी कम वोटिंग हुई है।
पिछले चुनाव में यहां से जीते भाजपा के सौरभ सिंह सोनू को 92824 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे सपा के सुनील कुमार लाला को 68551 वोट मिले थे। इस बार भी टक्कर इन्हीं दोनों के बीच है। भाजपा को जहां पार्टी का कैडर वोट और जातीय समीकरण के आधार पर जीत का भरोसा है, वहीं सपा मुस्लिम, सिख और पिछड़ों के भरोसे जीत का दावा कर रही है। जातीय ध्रुवीकरण का भी असर यहां देखने को मिला है, जिससे भाजपा और सपा में कांटे की टक्कर है।
भाजपा प्रत्याशी सौरभ सिंह सोनू का कहना है कि डबल इंजन की सरकार पर जनता ने भरोसा किया है। दस मार्च को वह दोबारा विधायक बनेंगे। वहीं, सपा प्रत्याशी सुनील कुमार लाला का कहना है कि जनता ने जुमलेबाज सरकार को हटाने और बदलाव की दिशा में मतदान किया है, जिससे सपा की सरकार बनेगी। उधर, बसपा प्रत्याशी हेमवती राज का कहना है कि एग्जिट पोल झूठ हैं, जनता ने बसपा के शासनकाल को मतदान किया है। बसपा बड़ी ताकत के रूप में उभरेगी।
कांग्रेस प्रत्याशी राधेश्याम भार्गव ने भी अपनी जीत का दावा करते हुए बताया कि भाजपा ने लोगों को गुमराह किया है, 10 मार्च को एग्जिट पोल की पोल खुल जाएगी।

निघासन विधानसभा
तिकुनिया हिंसा का रहा व्यापक असर, यहां भी सपा-भाजपा हैं आमने-सामने
निघासन। विधानसभा क्षेत्र में पिछले साल तीन अक्तूबर को हुई तिकुनिया हिंसा का व्यापक असर चुनाव में दिखा, लेकिन जातीय गणित ने भी यहां खूब खेल दिखाया, जिससे मुकाबला फिर से सपा और भाजपा के बीच ही माना जा रहा है। हालांकि, तिकुनिया हिंसा के बाद यहां कांग्रेस के बड़े नेताओं के खूब दौरे हुए, बावजूद इसके जातीय गणित सब पर भारी रहा।
निघासन में इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले 1.91 फीसदी अधिक वोटिंग हुई। पिछले साल यहां 67.52 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, जबकि इस बार 69.43 फीसदी वोटिंग हुई है। मुख्य टक्कर पिछली बार की तरह सपा और भाजपा में ही है। 2017 के चुनाव में यहां से भाजपा के रामकुमार वर्मा को 107487 और दूसरे नंबर पर रहे सपा के कृष्ण गोपाल पटेल को 61334 वोट मिले थे।
2019 में रामकुमार वर्मा के निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें मौजूदा विधायक शशांक वर्मा को 120269 और सपा के मो. कयूम को 66987 वोट मिले। दलित बहुल निघासन विधानसभा में जहां भाजपा के शशांक वर्मा तो वहीं सपा प्रत्याशी आरएस कुशवाहा को सिख और मुस्लिम वोट की बढ़त है, जबकि बसपा से मुस्लिम प्रत्याशी होने की वजह से मुस्लिम वर्ग के वोटों में बिखराव माना जा रहा था। मुस्लिम वोट सपा के पक्ष में जाने से सपा और भाजपा में कांटे की टक्कर है।
भाजपा के शशांक वर्मा का दावा है कि पिछली बार की तरह इस बार भी 100 प्रतिशत जीत पक्की है। योगी और मोदी के अलावा उन पर भी क्षेत्रीय जनता ने भरोसा जताया है, जबकि सपा के आरएस कुशवाहा का दावा है कि सभी वर्गों का वोट मिला है। मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग का वोट मिला है, जीत का अंतर 30 और 40 हजार के बीच में रहेगा। बसपा के आर एस उस्मानी ने दावा किया कि दलित और मुस्लिम दोनों समाज के लोगों ने भरोसा किया है। जीत भले ही कम अंतरों से हो, लेकिन जीत पक्की है। उधर, कांग्रेस के अटल शुक्ला का दावा है कि भाजपा की महंगाई के कारण लोग परेशान हैं। कांग्रेस का जनाधार बढ़ा है। इसलिए जीत सुनिश्चित है।

पलिया विधानसभा
ध्रुवीकरण के असर से इस बार सपा- भाजपा में कांटे की टक्कर
पलियाकलां। विधानसभा क्षेत्र पलिया में पिछले चुनाव में मुकाबला जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच था वहीं इस बार ध्रुवीकरण की वजह से मुकाबला सपा और भाजपा के बीच में माना जा रहा है। उधर, थारु क्षेत्र के लोगों की नाराजगी भी सपा और भाजपा में कांटे की टक्कर की एक बड़ी वजह है।
पिछले चुनाव में भाजपा के हरमिंदर सिंह उर्फ रोमी साहनी को 118069 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के सैफ अली नकवी को 48841 वोट मिले थे, लेकिन इस बार मुकाबला भाजपा के रोमी साहनी और सपा के प्रीतइंदर सिंह कक्कू के बीच देखा जा रहा है। बसपा का मुस्लिम प्रत्याशी होने के बावजूद मुस्लिम वोट एकतरफा सपा के पक्ष में गया है। उधर, थारु क्षेत्र के लोगों की भी भाजपा से नाराजगी दिखी तो दूसरा तिकुनिया कांड की वजह से सिख समुदाय का भी वोट बंटता नजर आया, इस कारण सीधी टक्कर सपा और भाजपा में है।
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भाजपा प्रत्याशी रोमी साहनी का कहना है कि इस बार भाजपा के कार्यों और उनके द्वारा किए गए कामों को जनता ने देखा है। इस बार हम भारी मतों से चुनाव जीत रहे हैं और प्रदेश में फिर से पूर्ण बहुमत के साथ योगी सरकार आ रही है। वहीं, सपा प्रत्याशी प्रीतइंदर सिंह कक्कू का कहना है कि किसान, आम आदमी और गरीब तबके के ऐसे लोग जिनके खेतों में आवारा मवेशी नुकसान पहुंचाते हैं उन लोगों ने इस बार जीत का भरोसा दिया है। कांग्रेस प्रत्याशी रिसाल अहमद का कहना है कि प्रियंका गांधी से महिलाओं और युवाओं का जुड़ाव हुआ है जिसके चलते इस बार कांग्रेस के पक्ष में वोट पड़े हैं, जबकि बसपा प्रत्याशी डॉ. जाकिर हुसैन ने कहा कि हर वर्ग के लोगों ने इस बार बहन मायावती पर भरोसा जताया है, जिसके चलते सभी वर्गों का वोट उन्हें मिला है। वे जीत अवश्य हासिल करेंगे।

 
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