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एक और ग्रामीण की बाघ के हमले में मौत के बाद ग्रामीणों में नाराजगी तेज

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विलाप करते परिजन।
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मवेशी चराने गए ग्रामीण को बाघ ने बनाया था निवाला, अधखाया शव बरामद
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तिकुनिया। क्षेत्र में मवेशी चरा रहे एक और ग्रामीण की बाघ हमले से मौत के बाद गांव वालों में वन विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि इस इलाके में पिछले एक साल के अंदर बाघ 16 ग्रामीणों को निवाला बना चुका है। बावजूद इसके वन विभाग लापरवाह बना हुआ है। रेंजर ने घटना की पुष्टि करते हुए ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
बहराइच जिले से सटे मंझरापूरब ग्राम पंचायत के मजरा गांव चौधरीपुरवा निवासी 39 वर्षीय इंद्रजीत पर मंगलवार दोपहर बाघ ने मंगलवार को उस समय हमला कर दिया जब वह कविराज दलराजपुर गांव के पास जंगल के किनारे मवेशी चरा रहा था। बाघ उसे जंगल में खींच ले गया जहां बाघ ने उसके शरीर का कुछ हिस्सा खा लिया। साथ में गए एक लड़के ने गांव में आकर घटना की सूचना दी। इस पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और शाम करीब सात बजे जंगल के अंदर इंद्रजीत का अधखाया शव बरामद कर लिया। ग्रामीणों ने घटना की सूचना वन विभाग और पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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ग्राम प्रधान रामपाल ने बताया कि अब तक बाघ 16 लोगों को मौत के घाट उतार चुका है। बावजूद इसके भी वन विभाग ने ग्रामीणों के बचाव के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं। बाघ हमलों से आजिज ग्रामीणों ने दो माह पहले प्रदर्शन कर बाघ और जंगली हाथियों से ग्रामीणों को सुरक्षित करने की मांग की थी।
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उत्तर निघासन वन रेंज बेलरायाके रेंजर विमलेश कुमार ने बताया कि ग्रामीणों को हमेशा जंगल के निकट न जाने की सलाह दी गई है। फिलहाल गश्त तेज कर दी गई है। पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने बताया कि मृतक इंद्रजीत के भाई सियाराम की ओर से तहरीर मिली है जिसमें बाघ द्वारा उनके भाई को मारने कि शिकायत दर्ज है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
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