पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में सुनवाई का बहिष्कार
316 एकड़ भूमि अधिग्रहण के प्रयास में है आवास एवं विकास परिषद
उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने शहर से सटे गांव राजापुर में आवासीय योजना के क्रियान्वयन को भूमि के अधिग्रहण से पूर्व आपत्तियों का निस्तारण का होने वाली सुनवाई नहीं हो सकी। अपनी जमीन न देने का फैसला लेते हुए किसानों ने सुनवाई नियोजन समिति के सामने विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का कहना था कि भूमि अधिग्रहण के विरोध में पहले ही आपत्ति दी जा चुकी है, इसके बावजूद मंगलवार को नियोजन समिति ने सुनवाई की तिथि घोषित कर दी। एक भी किसान समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ।
बता दें कि राजापुर एलआरपी रोड पर भूमि विकास एवं गृहस्थापन योजना के लिए परिषद 316.836 एकड़ जमीन अधिग्रहित करना चाहता है। इसके लिए राजकीय गजट का प्रथम प्रकाशन चार सितंबर 2010 को कराया जा चुका है। इससे करीब 181 किसानों की खेती योग्य जमीन अधिग्रहण के दायरे में आ गई है। किसानों ने परिषद को जमीन देने से इंकार करते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसके बाद काफी समय तक अधिग्रहण का मामला फाइलों में दबा रहा। अब परिषद ने फिर से भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही प्रारंभ कर दी है। परिषद के निर्माण खंड त्रयोदशम के अधिशासी अभियंता विनीत सिंघल ने आपत्तियों की सुनवाई के लिए सात मार्च 2017 की डेट लगाई थी, जिसमें नियोजन समिति के समक्ष एलआरपी चौराहा स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में किसानों को बुलाया गया था। यहां पहुंचकर किसानों ने परिषद को जमीन देने से इंकार करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। काफी देर तक हंगामा होता रहा, जिससे कोई भी किसान नियोजन समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। प्रदर्शन कर रहे सुरेंद्र कुमार, सुनील, जितेंद्र, दिनेश कुमार ने बताया कि नोटिफिकेशन के बाद तुरंत बाद ही सभी किसानों ने जमीन देने से इंकार करते हुए नोटिस के माध्यम से संबंधित अधिकारियों सहित मुख्यमंत्री को अवगत करा दिया गया था। सुनवाई के लिए अतिरिक्त मजिस्ट्रेट इंद्रकांत द्विवेदी, अधिशासी अभियंता विनीत सिंघल, विम्मी अजमानी आदि मौजूद रहे।
ऐसे तो हो जाएंगे भूमिहीन
किसानों ने अधिग्रहण का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि एक तरफ सरकार भूमिहीनों को पट्टे का आवंटन कर रही है। वहीं दूसरी ओर अधिनियम का सहारा लेकर लघु एवं सीमांत किसानों को भूमिहीन बना देना चाहती है।
पहले भी जा चुकी सैकड़ों एकड़ जमीन
ग्राम पंचायत राजापुर किसानों का आरोप है कि पहले भी कई सरकार भवनों के लिए जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है। इसी ग्राम पंचायत की सैकड़ों एकड़ भूमि पर डायट, आईटीआई प्रशिक्षण केंद्र, मंडी समिति, जिला उद्योग केंद्र और इंडस्ट्रीज एरिया स्थापित है, जिसमें सैकड़ों किसानों की कृषि योग्य भूमि कौड़ियों के भाव चली गई।
आपत्तियों की सुनवाई के लिए हुई बैठक में कोई किसान उपस्थित नहीं हुआ है। नए अधिग्रहण कानून के मुताबिक ही 88 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर मुआवजा किसानों को देय है। आपत्ति सुनवाई में किसानों के न आने से माना जाएगा कि किसी किसान को अधिग्रहण में आपत्ति नहीं है, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
-विनीत सिंघल, अधिशासी अभियंता, आवास विकास परिषद