जंगल में संवेदनशील स्थलों पर लगाए जाएंगे चार फिक्स और दो सचल टावर
टावर की रेंज में होने वाले अपराधों, नए आने वाले अपराधियों की मिलेगी सूचना
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) की सुरक्षा अब ई-सर्विलांस के जरिए होगी। इसके तहत पूरे टाइगर रिजर्व के संवेदनशील स्थलों पर चार फिक्स और दो सचल टावर स्थापित किए जाएंगे। यह टावर कैमरों और जीपीएस सिस्टम से लैस होंगे। यह टावर 25 किलोमीटर के दायरे में होने वाली गतिविधियों के बारे में कंट्रोल रूम को एलर्ट करेंगे। इस प्रणाली से वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को नए आयाम मिलने की उम्मीद है।
दुधवा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों का शिकार और अवैध कटान आदि आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए ई सर्विलांस के जरिए निगरानी की योजना बनाई गई है। मुख्य वन संरक्षक एवं दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने यह योजना तैयार की है, जिसे शासन की मंजूरी मिल गई है। इसके तहत दुधवा टाइगर रिजर्व में शिकार और अवैध कटान आदि अपराधों के मद्देनजर संवेदनशील स्थलों पर चार फिक्स और दो सचल टावर लगाए जाएंगे। यह टावर 25 किलोमीटर के दायरे में होने वाली किसी भी गतिविधि को कैच कर सकेंगे। संवेदनशील स्थलों का चयन वहां के क्राइम डाटा और जैविक दबाव के आधार पर किया जाएगा। ई-सर्विलांस सिस्टम के लिए कैंपा (कंपनसेटरी ए फॉरेस्टेशन फंड मैनजमेंट एंड प्लानिंग अथारिटी) धन उपलब्ध कराएगी।
ई-सर्विलांस सिस्टम ऐसे करेगा काम
टावर की रेंज में घुसपैठ करने वाले किसी भी वनापराधी, शिकार, अवैध कटान या आग आदि लगने की घटनाओं की तस्वीर और उनकी जीपीएस लोकेशन यह टावर कैच करके कंट्रोल रूम को भेज देंगे। साथ ही उस क्षेत्र में पेट्रोलिंग करने वाली टीमों को भी उनके एम स्ट्राइप्स एप पर एलर्ट मिल जाएगा। इससे तुरंत ही वन विभाग और सुरक्षा कार्यों में लगी फोर्स मौके पर पहुंचकर अपराध रोकने और अपराधी को पकड़ने में कामयाब हो सकेगी। यहीं नहीं दुधवा से बाहर के जानवरों के जंगल में आने और दुधवा के वन्यजीवों के बाहर निकलने की सूचना भी टावर के जरिए कंट्रोल रूम को मिलेगी। इससे मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने में भी मदद मिलेगी।
मौजूदा समय में स्टाफ की कमी से जूझ रहा डीटीआर
मौजूदा समय में दुधवा टाइगर रिजर्व स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। दुधवा टाइगर रिजर्व में जितने स्टाफ की जरूरत है उसमें सिर्फ 55 प्रतिशत स्टाफ ही उपलब्ध है। वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स भी तैनात है। बावजूद इसके करीब 2200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले दुधवा टाइगर रिजर्व की सुरक्षा के लिए यह स्टाफ पर्याप्त नहीं। माना जा रहा है निगरानी कार्यों के लिए लगाए जाने वाले कैमरे भी उतना प्रभावी परिणाम नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में ई सर्विलांस प्रणाली शिकार और अवैध कटान आदि आपराधिक घटनाओं को रोकने में कारगर साबित होगी ऐसी उम्मीद की जा रही है।
ई-सर्विलांस प्रणाली दुधवा टाइगर रिजर्व में शिकार और अवैध कटान आदि वनापराधों को रोकने में काफी हद तक कारगर साबित होगी। इस योजना को पर मार्च 2022 तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व