लखीमपुर खीरी। बारिश का मौसम बच्चों और बड़ों के लिए मुसीबत बन रहा है। बदल रहे मौसम के कारण बच्चे और बड़े बुखार के साथ डायरिया की चपेट में भी आ रहे हैं। ऐसे में ओपीडी में भी मरीज बढ़े हैं।
बारिश के मौसम में संक्रामक बीमारियां पांव पसार रहीं हैं। इनकी रोकथाम को लेकर किए जा रहे दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। संक्रामक रोगों के पांव पसारने से जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीज बढ़ते जा रहे हैं। पिछले एक माह में चिल्ड्रन वार्ड में डायरिया पीड़ित 17 बच्चे भर्ती हुए।
डॉक्टरों का कहना है कि बारिश के मौसम में जलभराव होता है और धूप निकलने पर उमस। ऐसे में बैक्टीरिया और मच्छर पनपते हैं। जो संक्रामक बीमारियों का कारण बनते हैं। यही नहीं बरसात के बाद निकलने वाली धूप से उमस होने पर डायरिया, गैस्ट्रोइंटाइटिस आदि के मामले बढ़ते हैं। इसलिए इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गों के विशेष देखभाल की जरूरत रहती है। इसलिए घर एवं इनके रहने वाली जगह की साफ सफाई और खान पान पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।
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दो तरह का होता है डायरिया
डायरिया दो तरह का होता है एक एक्यूट और दूसरा क्रॉनिक। एक्यूट डायरिया जीवाणु, विषाणु एवं पैरासाइट के कारण होता है। यह सामान्यत: एक सप्ताह में ठीक हो जाता है। मगर, जब यह बीमारी एक हफ्ते से ज्यादा दिन तक रह जाती है तो क्रॉनिक कहा जाता है। क्रॉनिक डायरिया आंत की विभिन्न बीमारियों के कारण हो सकता है। इससे पाचन तंत्र में गंभीर गड़बड़ी हो जाती है।
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डायरिया है घातक
डायरिया पेट की गड़बड़ी से जुड़ी समस्या है। आमतौर पर दस्त दो या तीन दिन में ठीक हो जाते हैं। मगर, दस्त एवं उल्टी होने पर शरीर का सारा पानी निकलने की वजह से यह जानलेवा भी हो जाता है। कमजोरी की वजह से मरीज बिस्तर पकड़ लेता है। डायरिया का कारण बैक्टीरिया और वायरस है।
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बच्चों में डायरिया के लक्षण
बच्चे का मुंह सूख रहा हो, बच्चे का पेट, आंख और गाल में सिकुड़न हो, बच्चा काफी देर तक पेशाब न करे, बुखार हो और रोने पर आंसू न निकल रहे हों
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ऐसे करें बचाव
डायरिया से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसके लिए खूब पानी पिएं।, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) का घोल पिएं, खाना कम खाएं, जूस एवं तरल पदार्थ पर्याप्त मात्रा में लेते रहें, वसा युक्त मसालेदार खाना न खाएं, खाने से पहले फल और सब्जियों को अच्छे से धो लें, जितनी भूख हो उससे थोड़ा कम खाएं और साफ पानी पीयें, खुले में बिकने वाले खाने से परहेज करें, नाखून छोटे रखें और उनकी साफ-सफाई का ध्यान रखें।
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बच्चों में डालें हाथ धोने की आदत
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा बताते हैं कि बच्चे हाथ धोने पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। इससे डायरिया सहित अन्य तमाम तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है। इसलिए बच्चों में हाथ धोने की आदत डालें। इसके लिए एंटी बैक्टीरियल साबुन इस्तेमाल करें। झाग उठने तक कम से कम 20 से 30 सेकेंड तक बच्चे को हाथ धुलाएं। इसके बाद साफ और सूखे तौलिये से हाथ पोंछना कतई न भूलें। बुखार एवं डायरिया होने पर बच्चों को अपने आप दवाएं न दें। उसे नजदीकी सरकारी अस्पताल या फिर जिला अस्पताल लेकर आएं।