लखीमपुर खीरी। जिले में मलेरिया बुखार पांव पसार रहा है। बावजूद इसके मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम की जिम्मेदारी उठा रहा जिले का मलेरिया ऑफिस खुद बीमार बना हुआ है। जिले की आबादी को देखते हुए न तो पर्याप्त स्टाफ और न ही दवाएं और गाड़ियां।
मलेरिया ऑफिस में फील्ड वर्कर की सबसे ज्यादा कमी है। हालांकि 26 पद हैं। मगर, तैनाती सिर्फ पांच की है। इसमें से तीन की ड्यूटी कोविड कंट्रोल रूम से और एक की ड्यूटी सीएमओ ऑफिस में लगी है। ऐसे में मलेरिया कार्यालय सिर्फ दो फील्ड वर्कर के सहारे चल रहा है। यह हालात तब हैं, जब जिले की जनसंख्या करीब 45 लाख है। स्टाफ के साथ साथ संसाधन का भी अभाव है। न तो पर्याप्त गाड़ियां हैं और न ही फॉगिंग मशीन। एक फागिंग मशीन है जो काफी दिनों से खराब है। अब जब जिले में मलेरिया ने पांव पसार दिए हैं तब जिम्मेदारों को उसे बनवाने की सुधि आई है।
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मलेरिया- यह मादा एनाफ्लीज मच्छर के काटने से फैलता है। मच्छर रुके हुए साफ पानी में प्रजनन करता है। मलेरिया का संक्रमण काल माह जुलाई से अक्तूबर तक चलता है। मलेरिया के रोगी को तेज ठंड व कंपकंपी के साथ एक दो या तीन दिन के अंतराल पर तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द रहता है। बहुत अधिक पसीने के साथ बुखार उतर जाता है।
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यह बरतें सावधानी
घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
कूलर व पानी की टंकी सप्ताह में एक बार खाली कर सुखा कर दोबारा प्रयोग करें।
शरीर के अधिकतर भाग को ढकने वाले कपड़े पहनें।
सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
दिन छिपने के समय खिड़की और दरवाजे बंद रखें।
बुुखार आने पर खून की जांच कराएं।
पॉजिटिव घोषित होने पर चिकित्सक की देखरेख में उपचार लें।
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केरोसिन के अभाव में नहीं हो पा रहा पैराथम का छिड़काव
जिला मलेरिया अधिकारी का कहना है कि दवाएं पर्याप्त मात्रा में हैं। एंटी लार्वा आदि का छिड़काव कराया जा रहा है। बस, पैराथाम का छिड़काव होना बाकी है, क्योंकि हमारे पास 45 लीटर पैराथाम है। इसके लिए 855 लीटर केरोसिन की जरूरत है। क्योंकि इसका छिड़काव केरोसिन में मिलाकर होता है। जिला पूर्ति अधिकारी को पत्र लिखा है। केरोसिन मिलते ही छिड़काव होना शुरू हो जाएगा।
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बेहजम के दो गांवों में मलेरिया के रोगी मिले थे। वहां पर एंटीलार्वा का छिड़काव कराकर 70 लोगों की स्लाइड भी बनवाई है। नगर पालिका से लेकर ब्लॉक स्तर तक दवाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। छिड़काव के लिए प्रधान वहीं से दवाएं ले सकते हैं।
-शैलेंद्र श्रीवास्तव, जिला मलेरिया अधिकारी