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शहर और गांवों में विधि विधान से पूजे गए गोवर्धन महाराज

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गोवर्धन भगवान की पूजा करतीं महिलाएं।
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लखीमपुर खीरी। शुक्रवार को जिले भर में गोवर्धन महाराज की पूजा हुई। महिलाओं ने सुबह उठकर बिना बोले सूप बजाकर दरिद्रता भगाने की परंपरा निभाई।
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दीपावली के दूसरे दिन शुक्रवार को शहर और गांवों में गोवर्धन पूजा का आयोजन हुआ। महिलाओं ने गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत, भंडार घर आदि की प्रतिमा बनाकर फल, फूल, धूप आदि से विधि विधिवत पूजन किया।पंडित प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि पुराणों में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है। इसमें भगवान कृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा का विधान है।
उन्होंने बताया कि ब्रजवासियों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण भगवान ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली में उठाकर इंद्रदेव के प्रकोप से बचाया था। महिलाओं ने घर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और लंबी उम्र की मंगल कामना के लिए विधि विधान से पूजन किया।
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पलियाकलां। दीपावली के अवसर पर शहर सहित क्षेत्र में काफी चहल पहल रही। लोगों ने मनभावन मिठाइयों के साथ ही चूरा, खील, खिलौना, भुर्की तथा पटाखों की जमकर खरीदारी करके घरों को बिजली की झालरों व दीप जलाकर रोशन किया।
शाम को पूजन अर्चन के बाद आतिशबाजी की गई और लोगों ने एक दूसरे को पर्व की बधाई दी। दीपावली के दूसरे दिन भगवान गोवर्धन की पूजा की गई। इसके साथ ही संर्पूणानगर, महंगापुर, गौरीफंटा, चंदनचौकी, भीरा सहित आसपास के क्षेत्रों में भी त्योहारों का उल्लास रहा।
ममरी। शुक्रवार सुबह महिलाओं ने गोवर्धन पूजा मनाई। घरों के आंगन में गाय के गोबर से घरौंदे और खिलौने बनाकर उसमें दीप जलाकर अन्नकूट महाराज और भगवान गोवर्धन का पूजन किया। अन्नकूट देवता को भोग लगाया। साथ ही कन्याओं को प्रसाद बांटकर इस मौके पर प्रत्येक घर में गोवर्धन पूजा हुई।
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छटा तेरी तीन लोक से न्यारी गोवर्धन महाराज
बांकेगंज। दिवाली के दूसरे दिन शुक्रवार को कस्बा के राधाकृष्ण मंदिर और घरों में गोवर्धन पूजा हुई।
मंदिर प्रांगण में शास्त्री कुसुम कुमार वाजपेयी ने गाय के गोबर से गोवर्धन महाराज स्थापित किए। इसके बाद सामूहिक रूप से गोवर्धन पूजा कर घर परिवार की उन्नति के लिए कामना की। मंदिर परिसर में गिरिराज महाराज की आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। शुक्रवार को महिलाओं ने सूप बजाकर पर्व की रस्म निभाई। इसके बाद महिलाओं ने विधि-विधान से पूजन किया।
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