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नदियों का जलस्तर घटा तो अब हो रहा कटान

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लखीमपुर खीरी में मोहाना नदी में कटान से पुरबिया बस्ती में कट रहे मकान। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। उत्तराखंड मेें पिछले दिनों हुई भारी बारिश के बाद बनबसा बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से खीरी जिले में शारदा और घाघरा नदियां उफनाई हुईं हैं। हालांकि बुधवार से नदियों का जलस्तर घटना शुरू हुआ है बावजूद इसके पलिया और तिकुनियां क्षेत्र में कई रास्तों पर पानी भरा हुआ तो कई गांवों से संपर्क कट गया है। नदियों का जलस्तर कम होने के साथ भू कटान का खतरा बढ़ गया है।
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बृहस्पतिवार को शारदा बैराज पर शारदा नदी का जलस्तर 135.45 सेंटीमीटर दर्ज किया गया जो अब भी खतरे के निशान 135.49 से महज चार मिलीमीटर नीचे है। जबकि घाघरा बैराज पर घाघरा नदी का जलस्तर 135.65 रिकार्ड किया गया जो खतरे के निशान 136.78 से सिर्फ 1.13 सेमी नीचे है।
शारदा नदी से पलिया संपूर्णानगर, निघासन, धौरहरा और फूलबेहड़ का इलाका प्रभावित है। वहीं घाघरा नदी से रमियाबेहड़, धौरहरा और निघासन का कुुछ क्षेत्र प्रभावित है। भारत नेपाल सीमा पर बहने वाली मोहाना और कर्णाली नदियां तिकुनिया क्षेत्र में कहर ढा रहीं हैं। नेपाल में ज्यादा बारिश होने से मोहाना और कर्णाली नदियां तिकुनियां क्षेत्र में विनाशलीला कर रहीं हैं। बाढ़ को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क है।
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बाढ़ से अब तक 174 गांव प्रभावित
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में बाढ़ से अब तक 174 गांव प्रभावित हुए हैं। इनमें से करीब 15 गांवों का संपर्क अब भी दूसरे गांवों से कटा हुआ है। बाढ़ से 30282 लोग प्रभावित हुए है। 9583 हैक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित है। इसमें 8636 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि शामिल है। बाढ़ से 8446 हेक्टेयर भूमि पर खड़ी फसल नष्ट हो गई। जबकि 473.47 हेक्टेयर कृषि भूमि फसल सहित कटकर नदियों में समा चुकी है।
बाढ़ और कटान से जिले में अब तक 1378 लाख रुपये मूल्य की फसलों को नुकसान हुआ है। जबकि 90 पक्के और 101 कच्चे घर गिर चुके हैं।
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बोझवा में रेलवे लाइन पार खेतों में नाव से जा रहे ग्रामीण
पलियाकलां। बनबसा बैराज से लगातार दूसरे दिन पानी की रिलीजिंग न होने के कारण शारदा नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि बोझवा में रेलवे लाइन पार ठोकर नंबर जीरो व एक पर अब भी काफी पानी है। जिसके चलते ग्रामीण नाव के सहारे आवागमन कर रहे हैं। उधर सुहेली नदी के जलस्तर में भी गिरावट आई है।
बुधवार से शारदा नदी में बनबसा बैराज से पानी रिलीज नहीं किया गया। जिसके चलते शारदा नदी का जलस्तर अब कम होने लगा है। हालांकि नदी का जलस्तर अब भी खतरे के निशान से 42 सेंटीमीटर ऊपर 154.520 सेंटीमीटर पर बह रहा है। जल आयोग का कहना है कि लगातार जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि रास्ते अब भी बंद है। इमलिया फार्म जाने वाले रास्ते पर भी आवागमन पूरी तरह से ठप है। संवाद
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बेलाकलां गांव में भरा सुहेली नदी की बाढ़ का पानी
मझगईं। दुधवा नेशनल पार्क के करीब बसे गांवों में सुहेली नदी का कहर जारी है। चौखड़ा फार्म में जहां चार दिनों से रास्तों व खेतों में पानी भरा हुआ है। वहीं बेला कलां गांव के कई घरों में बाढ़ का पानी भर गया है। जिससे लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पार्क के जंगल में निकली सुहेली नदी उफनाई हुई है। इसके चलते उसका पानी चौखड़ा फार्म में खेतों व रास्तों पर करीब दो से तीन फुट तक भरा हुआ है। वहीं अब बेलाकलां में भी बाढ़ का पानी आधा दर्जन घरों में भर जाने से लोगों की दिल की धड़कनें बढ़ गईं हैं। संवाद
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बझेड़ा में तटबंध का कटान रुका
बिजुआ। तीन दिन पहले शारदानदी में आई तेज बाढ़ से बझेड़ा के पास बांध का जो डौला कट रहा था, नदी का जलस्तर कम हो जाने से अब यहां कटान रुक गया है। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड ने कटे हुए स्थान पर परक्युपाइन और मिट्टी की बोरियां लगाकर कटान रोकने में सफलता हासिल कर ली है। मजदूर परक्युपाइन बनाकर उसमें पेड़ की डालें रखकर कटे हुए स्थान पर डाल रहे हैं।
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नहीं थम रहा है मोहाना नदी से कटान, पुरबिया बस्ती पर खतरा
तिकुनियां। मोहाना नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही भूकटान तेज होने लगा है। ग्राम पंचायत गंगानगर की पुरबिया बस्ती में दो घर नदी में लटके हैं। गांव को बचाने के लिए प्रशासन कोई बंदोबस्त नहीं कर सका है। भारत नेपाल सीमा पर गंगानगर गांव के निकट मोहाना नदी बह रही है। यहां किसानों की हरी-भरी फसलें और घर नदी में समा रहे हैं। गांव निवासी राकेश राजेश ने बताया कि उनका घर आधा कट गया है। इसके अलावा गुरतेज सिंह, बलकार सिंह का घर भी कटान के निशाने पर है। नदी का कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग का बंबू कटर भी नदी में बह गया है। तहसीलदार विपिन दुबे ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को राहत और बचाव का आश्वासन दिया है। संवाद
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