क्षेत्र के गांव गंगापुरवा में सोमवार की शाम जमीन के विवाद में सगे भाई ने अपने घर वालों के साथ मिलकर मंझले भाई की धारदार हथियारों से हत्या कर दी और सभी फरार हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। सीओ ने आरोपियों को शीघ्र पकड़ने का आदेश दिया है। मृतक के बेटे ने अपने चाचा- चाची और चचेरे भाई और दो बहनों के खिलाफ तहरीर दी है।
मृतक के बेटे सतीश ने बताया कि गांव के उत्तर में गेहूं का खेत है। गेहूं की फसल में चूहे अधिक होने के कारण उसके पिता रामजीवन सोमवार की शाम करीब पांच बजे चूहा मार दवा रखने गए थे। सतीश भी उस खेत के पड़ोस में जुती पड़ी जमीन को बराबर करने के लिए गया था। उस समय उसके चाचा कैलाश और परिवार के लोग बरसीम वाले खेत में खड़े थे। सतीश खेत बराबर करने के लिए चला गया। इसी बीच रामजीवन को अकेला देखकर कैलाश आदि ने उसे मारने के लिए दौड़ाया। अपनी तरफ आता हुआ देखकर रामजीवन भागने लगा। रामबहादुर के गन्ने के खेत के पास रामजीवन को पकड़कर हमलावरों ने उनके सीने, पेट और गर्दन पर कई प्रहार किए, जिससे उसकी मौत हो गई। चीख-पुकार सुनकर सतीश भी वहां पहुंच गया। हमलावर उसे आता हुआ देखकर भाग निकले। सतीश ने बताया कि उनका चाचा कैलाश के साथ जमीनी को लेकर विवाद कई सालों से चल रहा है, जिसके चलते ही पिता की हत्या की गई। एसओ आरके यादव ने बताया कि मृतक रामजीवन के बेटे सतीश ने चाचा कैलाश, चाची कांति देवी, चचेरे भाई अंकित, बहनों टुनटुनिया, गंगात्री के खिलाफ हत्या की तहरीर दी है। जांच की जा रही है। दोषी मिलने पर सभी आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। सीओ मोहम्मद इब्राहिम ने आरोपियों को शीघ्र पकड़ने के निर्देश दिए हैं।
जमीन के विवाद के चलते वर्षाें से सुलग रही थी चिंगारी
निघासन। धरमापुर के मजरा गंगापुरवा निवासी मृतक रामजीवन तीन भाई हैं। बड़ा भाई प्यारेलाल, मंझला मृतक रामजीवन और छोटा कैलाश है। आरोप है कि कैलाश ने पिता बाबूराम को बहला-फुसालकर अपने नाम तीन बीघा जमीन कई साल पहले बैनामा करा ली थी। इस बात को लेकर भाइयों में विवाद रहता था। सात साल पहले पिता की मौत के बाद बची साढ़े 12 बीघा जमीन तीनों भाइयों के नाम आ गई। इस पर प्यारेलाल और रामजीवन ने ऐतराज जताया। तीनों भाई आमने-सामने आ गए। आरोप है कि इसी को लेकर कैलाश ने मंझले भाई रामजीवन की हत्या कर दी।
परिवार में मचा कोहराम
रामजीवन की हत्या से उसकी पत्नी कोकिला, बेटा सतीश, पुत्री खुशबू का रो-रोकर बुरा हाल है। रामजीवन के बड़े भाई प्यारे ने बताया कि कैलाश ने करीब पांच दिन पहले उसे भी मौत के घाट उतारने की धमकी दी थी। बताया जाता है कि प्यारे लाल और रामजीवन के दबाव बनाने पर कई बार पंचायत हुई, लेकिन कैलाश ने जमीन देने से मना कर दिया था।