कोर्ट के बाहर मौजूद जितिन प्रसाद।
चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का सात साल पुराना मामला
लखीमपुर खीरी। सात साल पुराने चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में एडीजे रामेंद्र कुमार ने प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। बृहस्पतिवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए अभियोजन पक्ष के सबूतों को नाकाफी बताया और संदेह का लाभ देते हुए जितिन प्रसाद को मामले से बरी करने का हुक्म सुनाया है। मामले में 313 सीआरपीसी के तहत बयान मुलजिम 2019 में ही बन गए थे, लेकिन इसे संयोग ही कहा जाएगा की बरी होते-होते दो साल लग गए।
बताते चलें कि 2015 के लोकसभा आम चुनाव के दौरान मितौली क्षेत्र में चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में कांग्रेस प्रत्याशी जितिन प्रसाद और स्थानीय ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राम सागर मिश्रा के खिलाफ सेक्टर प्रभारी ने चुनाव आचार संहिता उल्लंघन की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अभियोजन पक्ष रखते हुए सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर ने बताया कि 25 अप्रैल 2014 के आम चुनाव के दौरान कांग्रेस से लोकसभा उम्मीदवार जितिन प्रसाद ने मितौली कस्बे में सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध करते हुए चुनाव प्रचार रैली आयोजित की थी, जिसमें 40-45 चार पहिया गाड़ी व 120 से अधिक मोटरसाइकिल मौजूद थीं। कांग्रेस पार्टी का प्रचार कर रहे इन कार्यकर्ताओं को हमारा पेट्रोल पंप मितौली पर मोटरसाइकिल आयोजक की ओर से दो दो लीटर पेट्रोल दिया जा रहा था।
सेक्टर मजिस्ट्रेट नरेश चंद्र ने इस संबंध में फोटोग्राफी कराते हुए कांग्रेस प्रत्याशी जितिन प्रसाद और स्थानीय आयोजक राम सागर मिश्र के खिलाफ चुनाव आचार संहिता उल्लंघन की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी मामले की जांच के बाद जितिन प्रसाद और राम सागर मिश्र के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। अदालती सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से नरेश चंद्र, कांस्टेबल अमर सिंह व रमेश चंद्र पांडे की गवाही अदालत में दर्ज कराई गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से दाखिल गवाहों और कागजातों से इनकार करते हुए जितिन प्रसाद ने बताया था कि कांग्रेस पार्टी की छवि को धूमिल करने के लिए झूठी एफ आई आर दर्ज कराई गई है। कार्यक्रम की अनुमति प्राप्त थी फिर भी उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही राम सागर मिस्र की मृत्यु हो गई थी जिसके बाद अकेले जितिन प्रसाद ही मुकदमे का सामना कर रहे थे। अदालत ने अपने फैसले में केवल सरकारी मुलाजिमों की गवाही होने की बात प्रमुखता से उठाते हुए कहा बृहस्पतिवार को कहा कि जनता के गवाह नहीं पेश किए गए। पेट्रोल खरीदने की रसीदें नहीं दाखिल की गई। रोड जाम किए जाने के बारे में कोई सबूत नहीं दिया गया। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए जितिन प्रसाद को बरी करने का फैसला सुना दिया। एडीजीसी कौशल किशोर ने बताया अभी उन्हें फैसले की प्रति नहीं मिली है। निर्णय को अध्ययन करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।