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हर गांव में बनेंगे गुलाबी सामुदायिक शौचालय

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हर गांव में बनेंगे गुलाबी सामुदायिक शौचालय
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पडरौना। ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए अब हर ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय बनाया जाएगा। ग्राम पंचायतें राज्य वित्त या 14वें वित्त आयोग से बजट का प्रबंध करेंगी। प्रत्येक शौचालय पर दो लाख रुपये खर्च होंगे। इनका संचालन भी ग्राम पंचायतों के जिम्मे होगा। शौचालयों का निर्माण एक साथ पूरे जिले में शुरू कराने की योजना है। पंचायतीराज विभाग ने 15 मार्च तक इन सभी सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूर्ण कराने के लिए कार्ययोजना बनाई है।
जिले में 1049 ग्राम पंचायतें हैं जिनमें अब तक पंचायतीराज विभाग की तरफ से करीब चार लाख व्यक्तिगत शौचालय बनाने का दावा किया गया है। परंतु अब भी गांवों में तमाम लोग ऐसे हैं जिनके घर शौचालय नहीं है। इसके चलते ग्राम पंचायतों को वास्तविक रूप से खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) नहीं बनाया जा सका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वच्छ भारत मिशन की तरफ से प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय भी बनाने का निर्णय लिया गया है। बृहस्पतिवार को डीपीआरओ राघवेंद्र द्विवेदी ने सभी एडीओ पंचायत को पत्र भी जारी कर दिया। इस पत्र में गांव के सार्वजनिक स्थान पर सामुदायिक शौचालय बनवाने का निर्देश दिया गया है। इसमें महिला व पुरुष के लिए अलग-अलग शौचालय के साथ ही स्नानघर व यूरिनल का भी इंतजाम रहेगा। इन सामुदायिक शौचालयों को विशेष तौर पर महिलाओं के लिए डिजाइन किया जा रहा है, जिससे कि उनकी दिक्कतें कम हो सकें। इसीलिए इन सामुदायिक शौचालयों को पिंक वुमन पब्लिक टॉयलेट नाम दिया गया है।
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एक पखवारे में निर्माण की चुनौती
इन सामुदायिक शौचालयों को 15 मार्च तक ही पूरा कराने का लक्ष्य है। परंतु टैंक व नींव से लेकर छत डालने तथा फिर सफाई, दरवाजे लगाने आदि का कार्य इतने कम समय में पूरा होना काफी मुश्किल है। डीपीआरओ ने बताया कि इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों का सहयोग लिया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक शौचालय में 24 घंटे पानी का इंतजाम करने के लिए भी अलग से इंतजाम करना होगा। इन सभी मुद्दों पर विचार-विमर्श चल रहा है।
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योजना मूर्त रूप ले तो बदलेंगे हालात
ग्राम प्रधान संघ फाजिलनगर के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि स्वच्छता मिशन की योजनाएं तो काफी अच्छी बनती हैं लेकिन इनके क्रियान्वयन में गड़बड़ी हो जाती है। इसके चलते योजनाओं का लाभ आम लोगों को नहीं मिल पाता। व्यक्तिगत शौचालय निर्माण में ही अब भी तमाम जगह निर्माण कार्य अपूर्ण हैं। सामुदायिक शौचालयों का भी बेहतर लाभ तभी मिल पाएगा जब योजना में खर्च की जा रही धनराशि का सदुपयोग हो और सभी गांवों में इनका निर्माण पूर्ण कराया जाए।
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