विलाप करते मृतक रमेश यादव के परिजन ।
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खड्डा। माता-पिता ने तो रमेश को अच्छी तालीम दिलाने के लिए गोरखपुर भेजा था। गांव वाले भी रमेश के मृदुभाषी स्वभाव के मुरीद थे, लेकिन जैसे ही उसकी हत्या की खबर के साथ उसकी गलत संगत की जानकारी हुई, लोग हैरान रह गए। रमेश की मौत की खबर से घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल था। मां को यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा।
हनुमानगंज थाना क्षेत्र के बोधीछपरा गांव के निवासी पूर्व प्रधान परमहंस यादव की पांच संतानों में रमेश यादव दूसरे नंबर का था। मां-बाप उसकी अच्छी तालीम और सुनहरे भविष्य के ख्वाब देखा करते थे। यही वजह थी कि उसे शुरू से ही अपने से दूर रखकर तालीम दिलाते रहे। उन्हें विश्वास था कि रमेश अच्छा इंसान बनकर घरवालों का नाम रोशन करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
गलत सोहबत में पड़ जाने के कारण कुछ वर्षों से गोरखपुर जनपद के विभिन्न थानों में रमेश यादव पर आपराधिक मुकदमे दर्ज होते गए, जिसकी वजह से उसे जेल भी जाना पड़ा। पिता परमहंस ने बताया कि पहली जनवरी को रमेश घर आया था।
घटना की शाम मां को फोन करके बृहस्पतिवार की सुबह घर आने को कहा था, लेकिन रात में ही रमेश और उसके देवरिया के एक अन्य साथी की हत्या हो गई। परमहंस बताते हैं कि उनके बेटे की जान बूझकर हत्या की गई है। उन्होंने हत्यारों के खिलाफ गोरखपुर के शाहपुर थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। बोधीछपरा गांव में उसके शव के आने का इंतजार कर रहे लोग व मां को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि रमेश अब कभी जिंदा नहीं लौट पाएगा।