फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाढ़ से दु्श्वारी: रोहुआ नाला में पानी पार कर आना-जाना पड़ रहा लोगों को

विज्ञापन
विज्ञापन
रोहुआ नाले में घुसकर आना-जाना मजबूरी
विज्ञापन

दो पहिया और चार पहिया वाहन फंस जा रहे नाले में
ह्यूूम पाइप लगाकर बनाया गया था रास्ता, भर गया है बाढ़ का पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
छितौनी। खड्डा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों से गंडक नदी का पानी तो निकल गया है, लेकिन रोहुआ नाले में पानी अभी भी बरकरार है। आवागमन के लिए इस नाले पर ह्यूम पाइप डालकर बनाया गया रास्ता क्षतिग्रस्त होने से लोगों को पानी में घुसकर नाले को पार करना पड़ रहा है। ऐसी दशा में बाइक और चार पहिया वाहन फंस जा रहे हैं। दूसरे रास्तों से आने-जाने के लिए लोगों को बिहार के रास्ते होकर करीब 30 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। या फिर जान जोखिम में डालकर नाव से नाला पार करना पड़ रहा है। खेती के लिए नाले की दूसरी तरफ आने-जाने में किसानों को भी परेशान होना पड़ रहा है। खड्डा ब्लॉक के गंडक नदी के उस पार बसे बाढ़ प्रभावित गांव हरिहरपुर, नरायनपुर, शिवपुर, मरचहवा जाने के लिए साल के चार महीने लोगों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। तहसील मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इन गांवों में जाने के लिए सुदूर जंगल के रास्ते दो जनपद ही नहीं, बल्कि दो राज्यों की दूरियां तय करनी पड़ती हैं। ग्रामीणों को तहसील मुख्यालय खड्डा आने के लिए लगभग 30 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। वह गांव से पहले बिहार के नौरंगिया पहुंचते हैं, जहां नाव से जान जोखिम में डालकर रोहुआ नाला पार करने के बाद महराजगंज जनपद के सोहगीबरवा होते हुए 10 से 12 किलोमीटर की दूरी तय कर अपने गांव पहुंचते हैं। बाढ़ आने के बाद यह भी रास्ता भी कष्टदायक हो जाता है। इस बार की बाढ़ में नौरंगिया-सोहगीबरवा मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। कई सड़क जगह जगह टूटकर गड्ढे में तब्दील हो चुकी हैं।
रेता क्षेत्र वासियों की परेशानी को देखते हुए खड्डा के विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने गंडक नदी में भैसहां के सामने पीपा पुल लगाने की मांग की थी, जिस पर प्रदेश सरकार ने 2018 में पीपा पुल लगाने की स्वीकृति दे दी थी। पुल तो लग गया, लेकिन बरसात के समय में जब गंडक नदी उफान पर आती है, तो पुल हटा दिया जाता है। ग्रामीणों की मांग है कि पक्का पुल का निर्माण हो जाए तो 30 किलोमीटर की दूरी महज 10 किलोमीटर में सिमट जाएगी। इस बाबत खड्डा विधायक जटाशंकर त्रिपाठी का कहना है कि गंडक नदी पर पक्के पुल की कवायद चल रही है। मेरे मांगपत्र पर बीते दिनों विभाग के अधिकारियों द्वारा सर्वे करके शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। जल्द ही क्षेत्र के लोगों को बड़ी सौगात मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

चार माह तक गांव बन जाता है टापू
शिवपुर निवासी आनंद कुशवाहा ने बताया कि साल के आठ महीने तो पीपा पुल के रास्ते आवागमन होता है, लेकिन शेष चार महीने गांव पूरी तरीके से टापू बन जाता है। राकेश गुप्ता ने बताया कि इस बार की बाढ़ में गांव से पीपे के पुल को जोड़ने वाला रास्ता बह गया। गांव पूरी तरह से टापू बना हुआ है। रास्ता नहीं होने के कारण दुकानदार बाजार से सामान गांव में नहीं ला रहे हैं, जिससे रोजमर्रा की चीजें गांवों में नहीं मिल पा रही हैं। पक्का पुल बना जाता तो इस क्षेत्र के लोगों को बाढ़ से तो नही, लेकिन आवागमन में काफी हद तक राहत मिलती। सचिंद्र सिंह ने बताया कि वर्षों से बाढ़ आ रही है, लेकिन अभी तक बचाव कार्य के लिए जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की ओर से कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया। हर वर्ष की बरसात के महीने में जनजीवन अस्त व्यस्त हो जाता है। सद्दाम हुसैन ने बताया कि इस बार की बाढ़ में खूब क्षति हुई है। गांव को जोड़ने वाले सभी रास्ते बह गए हैं। सुरक्षित आवागमन के लिए पक्का पुल जरूरी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें