सरकारी आवास से वंचित हैं तीन सौ परिवार
पात्र होने के बावजूद भी झोपड़ी में गुजर-बसर कर रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। सरकार की ओर से सभी को छत मुहैया कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन खड्डा क्षेत्र के कुछ गांवों की स्थिति इस दावे को आइना दिखा रही है। गंडक नदी के किनारे बसे शाहपुर गांव में अधिकांश लोग अभी भी झोपड़ी में गुजर बसर कर रहे हैं। सरकारी आवास मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
खड्डा विकास खंड का गांव शाहपुर लगभग पचास वर्ष पहले गंडक नदी की कटान से समाप्त हो गया था। उन्हें विस्थापित करके नदी की दायीं तरफ बसाया गया। इस गांव के लोग दियारा की खेती पर आश्रित हैं। सरकार की ओर से सभी को छत मुहैया कराने का अभियान काफी समय से चलाया जा रहा है, लेकिन इस गांव के अधिकांश घर झोपड़ी के ही हैं।
इस गांव में चार सौ से ज्यादा परिवार निवास करते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक लगभग तीन सौ परिवार अभी भी आवास से वंचित हैं। ग्रामीण रामाशीष, मौला हसन, फूलबदन, लक्कड़, फुलवंती, चंचला, पारस, बिकाऊ, पिंटू, रामचंद्र, हरिलाल, हीरा, रविंदर, जोगिंदर, चंद्रभान उर्फ शराबी, सुभाष, गोपाल, रघुनाथ आदि बताते हैं कि संशोधित आवास सूची में नाम जोड़ा गया है। कई बार आवास के लिए ब्लॉक मुख्यालय दौड़कर थक गए हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। झोपड़ी के लिए भी दियारा से खर-खड़ई काटकर लाना पड़ता है। बांस व रस्सी भी महंगा हो गया है। हर साल झोपड़ी बनाना पड़ता है। गर्मी में तेज हवा चलने पर आग लगने की आशंका बनी रहती है। बरसात में पानी टपकता है। कमोबेश यही हाल गंडक नदी किनारे बसे सभी गांवों का है, जहां अभी भी सरकारी आवास के इंतजार में लोग झोपड़ी में गुजर कर रहे हैं।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि संतोष राजभर बताते हैं कि गांव के लगभग तीन सौ परिवार अभी भी सरकारी आवास से वंचित हैं। आवास के लिए बनी सूची फीडिंग में उड़ गई है। इसके लिए बार-बार ब्लॉक व जिला स्तर के अधिकारियों से मांग की जा रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गांव के लोग आवास मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
फाइल नंबर 30 का जोड
खड्डा बीडीओ आनंद प्रकाश ने कहा कि पूर्व में बनी सूची के आधार पर सरकारी आवास पात्र लोगों को दिया गया है। बाद में नई सूची भी बनाई गई है। शेष लोगों का सर्वे कराकर पात्र लाभार्थियों को नियमानुसार आवास उपलब्ध कराया जाएगा।
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सुधीर कुमार मिश्र