गैंगस्टर के मामले में तीन साल से जेल में बंद एक आरोपी फैसला आने से पहले ही सजा पूरी कर चुका था। कोर्ट ने सोमवार को सुनाए गए फैसले में उसे तीन साल की सजा को पर्याप्त माना। उस पर पांच हजार के अर्थदंड लगाया गया। फैसले में यह भी कहा गया है कि सजा में कारावास में बिताई गई अवधि भी जोड़ी जाएगी। अर्थदंड जमा न करने पर उसे एक माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भोगनी होगी।
सरायअकिल के बुद्धपुरी का प्रेम मौर्या के खिलाफ चोरी के कई मामले दर्ज थे। इसी कारण पुलिस ने उसके खिलाफ गैंगस्टर की भी कार्रवाई की थी। तीन साल से वह जेल में बंद है। यह मामला स्पेशल न्यायाधीश गैंगस्टर संजय कुमार मिश्र की अदालत में विचाराधीन था। लोक अभियोजक दिनेश कुमार ने आरोपी को सख्त सजा दिए जाने की मांग की। वहीं याची के अधिवक्ता ने उसकी परिस्थितियों का हवाला देते हुए कम से कम सजा दिए जाने की मांग की। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद प्रेम मौर्या को तीन साल की सजा व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति पर आरोपी को एक माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगा। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सजा में आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को भी जोड़ी जाएगी। इस बाबत जिला कचहरी के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिणांक मौलि विक्रम धर द्विवेदी का कहना है कि संगठित गिरोहबंद अपराध (गैंगस्टर) उस पर यह कार्रवाई की जाती है जो अपराध के जरिये अर्थ प्राप्त करता हो। रहा सवाल गैंगस्टर एक्ट में सजा का तो यह अपराध की प्रकृति पर निर्भर करता है। इसमें दोषी को तीन से सात साल तक की सजा सुनाई जा सकती है।