महज सात साल की उम्र लेकिन शतरंज की बिसात पर मोहरों को अपनी उगंलियों पर नचाने का ऐसा हुनर की बड़े-बड़े विरोधी पस्त हो जाएं। यह कारनामा कौशाम्बी के सात साल के खिलाड़ी कर रहे हैं। वह रोजाना घंटों अभ्यास कर के अपने को लगातार बेहतर बना रहे हैं। ताकि वह भी शतरंज के जादूगर प्रगनानंदा की तरह देश दुनिया में अपना और जिले का नाम रोशन कर सकें। साथ ही कोच और सोशल मीडिया पर वीडियो के जरिये शतरंज की बारीकियां सीख रहे हैं।
वहीं, जिले में शतरंज सात से 10 साल के बच्चों का रुझान बढ़ा है। खेल सचिव राघवेंद्र शुक्ला ने बताया कि करीब एक दर्जन बच्चे ऐसे हैं जो सात साल से कम हैं। इनमें चार श्रीहरि, पृथ्वी, पार्थ व तेजस नियमित अभ्यास कर रहे हैं। वह कम समय में शतरंज की बारीकियों को सीख गए हैं। वह अपनी उंगलियों पर मोहरों को नचाने में माहिर हैं। नियमित अभ्यास से वह एक दिन जिले के नाम रोशन करेंगे।
भाई को देखकर बढ़ी रुचि
- सात साल का पार्थ शतरंज का खिलाड़ी है। पार्थ को खेलता देख इनका भाई तेजस भी अभ्यास करने लगा। वह जिला स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेता है। तेजस की मां रंजीना केसरवानी गृहिणी है। वहीं, पिता सुभाषचंद्र केसरवानी का कारोबार है। इनका कहना है कि बच्चे को लगातार अभ्यास करा रहे हैं।
वहीं, श्रीहरि शतरंज की नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके हैं। इनको पिता अश्वनी मिश्रा इनका हर कदम में सहयोग करते हैं। पेशे से शिक्षक अश्वनी मिश्रा हर खेल प्रतियोगिता में इनको हिस्स दिलाने और अन्य प्रशिक्षण को लेकर पूरी तरह से समर्पित हैं। इसी प्रकार चायल के पृथ्वी पाल बेहतर खेलने के लिए लगातार प्रशिक्षण ले रहे हैं।