नोट : एडवाइजरी मांगा गया है
-एक अप्रैल से 31 अक्तूबर तक खाद्य सुरक्षा विभाग ने दुकानों से लिए थे 156 सैंपल
ओम प्रकाश मिश्र
करारी। दुकानदार त्योहार ही नहीं, आम दिनों में भी लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। दूध, पनीर और तेल से लेकर धनिया पाउडर आदि में मिलावट हो रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने बीते एक अप्रैल से 31 अक्तूबर तक विभिन्न दुकानों से 156 नमूने लिए। प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट में 58 नमूने फेल मिले। यही नहीं, छह सैंपल नुकसानदायक पाए गए हैं।
खाद्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा दूध व इससे निर्मित पनीर, मिठाई, छेना मानकों पर खरा नहीं उतरा। सरसों का तेल, दाल, नमकीन, धनिया पाउडर से लेकर मसाले तक के नमूने फेल मिले हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करारी की अधीक्षक/सीनियर फिजीशियन डॉ. बद्री विशाल का कहना है कि मिलावटी खाद्य सामग्री आम लोगों की सेहत के लिए नुकसानदायक है। धीरे-धीरे मिलावट सामग्री लोगों को बीमार कर देता है। संवाद
सामग्री लिए गए नमूने फेल नमूने
दूध 19 12
खोवा 20 03
पनीर 20 08
दूध मिठाई 27 07
अन्य मिठाई 13 09
सरसों का तेल 03 03
मसाले 05 02
अनाज 11 05
दाल 05 05
अन्य 23 13
15.50 लाख रुपये लगाया गया अर्थदंड
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिव प्रताप तिवारी ने बताया कि मिलावटखोरों के खिलाफ चलाए गए अभियान में अक्तूबर माह में 2.06 लाख रुपया का अर्थ दंड लगाया गया। जबकि एक अप्रैल से 31 अक्तूबर तक 158 मामलों में 15.50 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। 64 लोगों के खिलाफ एडीएम कोर्ट में प्राथमिकी दर्ज की गई है। असुरक्षित फूड में 13 मुकदमे एसीजेएम कोर्ट में दायर किया गया।
इन उपायों से मिलावटखोरी से बचें
नकली खाद्य पदार्थों की पहचान के लिए उनकी बनावट, रंग और गंध में अंतर देखें। पैकेट पर मौजूद लेबल, जैसे निर्माण और समाप्ति तिथि, और सुरक्षा होलोग्राम या क्यूआर कोड की जांच करें। घर पर आप कुछ सरल परीक्षण भी कर सकते हैं। जैसे दूध में स्टार्च की जांच के लिए आयोडीन का उपयोग करना या काली मिर्च में अन्य बीजों की पहचान करना। सबसे ज्यादा दूध से बनी मिठाइयों में मिलावट होती है।
बर्फी, पेड़ा, रसगुल्ला या लड्डू इन मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाला खोया या मिल्क पाउडर कई बार असली नहीं होता। अगर मिठाई का स्वाद असामान्य लगे या उसमें चिकनाहट ज्यादा महसूस हो तो समझ लें कि उसमें मिलावट की गई है। अक्सर मिठाइयों पर चांदी का वर्क चढ़ा होता है। कई बार यह असली चांदी नहीं होती, बल्कि एल्युमीनियम की परत होती वर्क को हल्के से अंगुली पर रगड़ें। अगर यह आसानी से गायब हो जाए और अंगुलियों पर कण न छोड़ें तो यह असली चांदी है। यदि यह चिपक कर रह जाए या चमकदार दाग छोड़ दे तो इसमें एल्युमीनियम की मिलावट है। इसके अलावा खुला पीसा मसाला न खरीदे। ब्रांडेड कंपनी का ही मसला खरीदें।
मिलावटखोरी रोकने के लिए सैंपल लिए जाते हैं। जिन व्यापारियों के नमूने फेल आए हैं, उनके विरुद्ध एडीएम कोर्ट व असुरक्षित नमूनों के व्यापारियों विरुद्ध सीजेएम अदालत में मुकदमा दर्ज कराया गया है। अधोमानक साबित होने पर व्यापारी के विरुद्ध पांच लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। असुरक्षित खाद्य सामग्रीसाबित होने पर सजा व जुर्माना दोनों हो सकता है। -ममता चौधरी, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन