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पर्यटन नक्से में आने पर खुलेंगे तरक्की के द्वार

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पर्यटन नक्शे पर आने से खुलेंगे तरक्की के द्वार
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महिला अस्पताल खुलने के साथ कड़ा, कौशाम्बी और पभोषा का भी होगा विकास
फोटो-
स्वागतम 2018-
फोटो नं-3, 4 व 5-
मंझनपुर (ब्यूरो)। नए साल में समृद्धिशाली विरासत वाले द्वाबा के उत्तर में कड़ा, दक्षिण में बसे ऐतिहासिक स्थल पभोषा, कौशाम्बी और अलवारा झील की तरक्की के दरवाजे खुलने की संभावना बढ़ गई है। वर्ष 2017 में शासन-प्रशासन की ओर से की गई कवायदों से उम्मीद है कि नए साल में कौशाम्बी विकास की राह पर सरपट भागने लगेगा। चल रहे प्रयासों को देखते हुए उम्मीद है कि मुख्यालय मंझनपुर के नगर पालिका बनाने का प्रस्ताव नए साल में मूर्त रूप ले लेगा। कोखराज-मनौरी तक पुराने जीटी रोड का चौड़ीकरण हो जाएगा। महिला में यमुना पुल व मनौरी में रेलवे ओवरब्रिज से भी आवागमन शुरू होने की उम्मीद है। महिला अस्पताल भी मूर्त रूप ले लेगा। कई शिक्षण संस्थानों के साथ ही ऐतिहासिक, धार्मिक स्थलों को विकसित करने की योजनाओं को भी हरी झंडी मिल जाएगी। यह सब होने के बाद द्वाबा का विकास धरातल पर दिखने लगेगा।
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कड़ा, कौशाम्बी और पभोषा का होगा विकास
सोलह महाजनपदों में शामिल वत्सराज उदयन की राजधानी कौशाम्बी के इतिहास का तीनों काल खंडों में खासा महत्व रहा है। गौरवशाली अतीत वाला जनपद मगर वर्तमान के हाल से बेहाल है। देश-प्रदेश में सत्तासीन भाजपा सरकार ने जैन, बौद्ध की तपस्थली कौशाम्बी में बिखरी विरासतों को सहेजने-संवारने का जिम्मा उठाया है। प्रदेश सरकार के डिप्टी सीएम केशव मौर्या द्वारा पर्यटन के नक्शे में शामिल कर गृह जनपद को विकसित करने की कवायद से यहां के बाशिंदों के सपनों को पंख लग रहे हैं। कड़ा स्थित मां शीतला का दरबार, राजा जयचंद्र का किला, ख्वाजा कड़क शाह की मजार, संत मलूकदास का आश्रम, ऐतिहासिक पर्वत प्रभाष गिरि पभोषा स्थित जैन मंदिर, बौद्ध नगरी कौशाम्बी, अलवारा झील आदि को विकसित करने के लिए डिप्टी सीएम के फरमान पर जिला प्रशासन ने एक हजार करोड़ से ऊपर की परियोजना तैयार कर शासन को भेज दी है। उम्मीद है कि इस वर्ष इन परियोजनाओं को स्वीकृति मिल जाएगी। ऐसा होने के बाद जिले की तस्वीर बदल जाएगी।
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शिक्षण संस्थान से दूर होगी अशिक्षा
बेहद पिछड़े जिलों में शुमार द्वाबा शिक्षा का हब बनने की ओर अग्रसर है। एक मेडिकल कॉलेज का निर्माण प्रस्तावित है। शासकीय निर्देश पर जिला प्रशासन ने इसके लिए जमीन की तलाश पूरी कर ली है। वर्ष 2018 में उम्मीद है कि इस बड़ी परियोजना को शासन की हरी झंडी मिल जाएगी। इसके अलावा इस साल निर्माणाधीन माध्यमिक शिक्षा के 17 शिक्षण संस्थानों का काम अगले सत्र में पूरा हो जाएगा। ऐसा होने के बाद महेवा, बम्हरौली, मिश्रपुर, अर्का महाबीरपुर, सहाबनपुर तथा लोधन का पुरवा समेत छह स्थानों पर राजकीय उच्चतर महाविद्यालय, राला, शेरगढ़, पंसौर, अमिरतापुर, रसूलपुर बदले, टेंवा, रामपुर धमावां, महराज का पूरा तथा ढोकसहा समेत नौ जगह पर राजकीय हाईस्कूल के साथ ही सिराथू में जीआईसी छात्रावास तथा ओसा में मॉडल स्कूलों के जरिए पिछड़े जिले के छात्र-छात्राओं को साक्षरता के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा।
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गरीबों को मिलेगा आशियाना, घर-घर होगी बिजली
सब कुछ ठीकठाक रहा तो द्वाबा के नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में बसे गरीबों का अपना आशियाना हो जाएगा। प्रधानमंत्री शहरी एवं ग्रामीण आवास योजना के तहत जिले 6079 गरीब परिवारों को एक अदद पक्की छत मुहैया कराने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र में बसे गरीबों के डेढ़ हजार से अधिक आवासों का निर्माण अंतिम पायदान पर है। उम्मीद है कि बाकियों का भी आशियाना वर्ष 2018 में बनकर तैयार हो जाएगा। इसी तहत घर-घर बिजली मुहैया कराने के लिए सौभाग्य योजना के तहत विद्युत विभाग मुफ्त कनेक्शन बाट रहा है। अंधेरे में ढिबरी के सहारे रात गुजारने वाले 60 हजार घरों को इस साल बिजली मुहैया कराने की योजना पर काम चल रहा है।
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क्या कहते हैं अफसर
जिले के विकास को लेकर शासन-प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय है। ऐतिहासिक, धार्मिक धरोहरों को संवारने की कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी जा चुकी हैं। नए सत्र में इन परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने की पूरी उम्मीद है।
मनीष कुमार वर्मा
जिलाधिकारी
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