तहसील क्षेत्र के गांवों में मजदूरों को काम नहीं मिलने का एक और कारण सामने आया है। गांवों में रहने वाले और प्रवासी मजदूरों का अभी तक जॉब कार्ड नहीं बनाया गया है। जॉब कार्ड के लिए तहसील क्षेत्र के तीनों ब्लॉकों में करीब पांच हजार मजदूर भटक रहे हैं। मजदूरों को जॉब कार्ड नहीं मिलने से उनको काम भी नहीं दिया जा रहा है। इससे मजदूरों का मनरेगा की मजदूरी से मोहभंग हो रहा है।
पंचायत चुनाव के बाद से गांवों में मनरेगा की मजदूरी करने के लिए आस लगाए बैठे मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। इसके पीछे बड़ी बात यह सामने आई है कि गांवों में मजदूरों को अभी तक जॉब कार्ड ही नहीं दिया गया है।
ऐसी स्थिति चायल तहसील क्षेत्र के तीनों ब्लॉक नेवादा, चायल और मूरतगंज की है। नेवादा विकास खंड के मखऊपुर गांव के ग्राम प्रधान अकील अहमद ने बताया कि उनके गांव में मनरेगा का बहुत काम है। लेकिन गांव के मजदूरों को पंचायत चुनाव के बाद अभी तक जॉब कार्ड नहीं उपलब्ध कराया गया है।
इस कारण बिना जॉब कार्ड के मजदूरों से काम कराने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। नेवादा विकास खंड के करीब बीस हजार मजदूरों को मजदूरी के लिए जॉब कार्ड का इंतजार है। इसी प्रकार चायल विकास खंड के सभी 28 गांवों में दस हजार मजदूरों को जॉब कार्ड नहीं उपलब्ध कराया गया है।
जबकि मूरतगंज विकास खंड के 47 गांवों में 15 हजार मजदूर जॉब कार्ड से वंचित हैं। जॉब कार्ड नहीं बनने से इलाके मजदूरों को मनरेगा का काम नहीं मिल रहा है। मूरतगंज बीडीओ देवेंद्र ओझा ने बताया कि जिले से जॉब कार्ड नहीं उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस कारण मजदूरों को जॉब कार्ड मिलने में कठिनाई हो रही है।
ब्लॉकों में दो-दो सौ में बेचा जा रहा जॉब कार्ड
जॉब कार्ड के लिए ब्लॉकों में भटक रहे मनरेगा के मजदूरों को दो-दो सौ में जॉब कार्ड बेचा जा रहा है। नेवादा विकास खंड परिसर में शुक्रवार को ऐसा ही कुछ देखने को मिला। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक ग्राम प्रधान ने बताया कि बिचौलियों के जरिए ब्लॉक में पैसा लेकर जॉब कार्ड दिया जा रहा है।
ग्राम प्रधान ने जेसीबी से खोदवाया तालाब, मजदूर नाराज
नेवादा विकास खंड के राजेंद्र नगर उर्फ कौड़िया गांव के मजदूर ग्राम प्रधान के रवैये से नाराज हैं। गांव के ही राम लाल, छोटकी, नरेश, शिवबली, उमेश कुमार, लालचंद्र आदि मजदूरों ने बताया कि ग्राम प्रधान ने मजदूरों का हक मारते हुए जेसीबी मशीन से तालाबी नंबर की खोदाई कराई है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत तहसील दिवस पर की है।