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योगी जी, धर्मनगरी पर ‘कृपा’ शासन में अटकी

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Yogi ji, stuck in 'Kripa' rule over Dharmanagari - फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। मुख्यमंत्री जी, आज आप प्रदेश के पौधरोपण अभियान की शुरुआत करने धर्मनगरी आ रहे हैं। आपके आगमन से जनता उत्साहित है। लोग उम्मीद लगाए हैं अब शासन में अटकी ‘कृपा’ धर्मनगरी पर जरूर बरसेगी। अधूरे विकास कार्य फिर से शुरू होंगे। दरअसल यहां पुल और बाईपास का निर्माण अधूरा है। कई सड़कें टूटी, तो कई अधूरी पड़ी हैं। गंदगी से पटी मंदाकिनी नदी की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं। स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। पिछले महीने डॉक्टरों की लापरवाही से प्रसूता की मौत का मामला प्रदेश भर में गूंजा था। यहां स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी और भी समस्याएं हैं। इनका समाधान हो जाए और अधूरे विकास कार्य पूरे हो जाएं तो जनता जर्नादन को राहत मिले।
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11 साल में तैयार हो पाए पुल के 12 पिलर, 42 बनने हैं
मऊ क्षेत्र में यमुना नदी के महिला घाट पर उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने वर्ष 2011 में पुल का निर्माण शुरू किया था। अब तक 12 पिलर ही तैयार किए जा सके हैं जबकि 42 पिलर बनाने हैं। पुल की लागत 49.53 करोड़ रुपये थी। 40.53 करोड़ मिले थे। इसमें 32.31 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस समय काम रुका है। विभागीय अफसर ने बताया कि लागत बढ़ गई है। बजट रिवाइज होगा। फाइल अटकी है।
ठंडे बस्ते में चली गई बाईपास की फाइल
जाम से निजात दिलाने के लिए बाईपास रोड की बहुत जरूरत है। तत्कालीन सदर विधायक और लोक निर्माण राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने इसके लिए प्रयास किए थे। भरतकूप कस्बे से लोढ़वारा मोड़ होते हुए खोह के पास राष्ट्रीय राजमार्ग में जुड़ने वाले इस बाईपास की फाइल भी चल पड़ी थी। वर्ष 2022 के चुनाव में इसे गिनाकर लोगों से वोट भी मांगे गए, लेकिन चंद्रिका प्रसाद के हारते ही बाईपास निर्माण की फाइल ठंडे बस्ते में चली गई।
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चार साल से रुका रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण
जिला मुख्यालय के खोह गांव के पास चित्रकूट-मानिकपुर रेलवे लाइन पर ओवरब्रिज का निर्माण कार्य चार साल से रुका पड़ा है। रेलवे फाटक बंद होने पर आए दिन यहां पर जबरदस्त जाम की समस्या बनी रहती है। इस पुल का निर्माण रिवाइज इस्टीमेट के पेच में फंसा है।
200 बेड के अस्पताल में सिर्फ ओपीडी लगती
जिला मुख्यालय के खोह गांव में केंद्र सरकार के सहयोग से 87 करोड़ की लागत से 200 बेड का जच्चा-बच्चा अस्पताल बनाया गया था। डॉक्टरों-कर्मचारियों की कमी के कारण अस्पताल महज ओपीडी भर के लिए रह गया है। जिला अस्पताल, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, 28 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी डॉक्टरों, कर्मचारियों और अन्य सुविधाएं की कमी है।
तीन साल पहले तोप बनाने के लिए खरीदी थी जमीन
युवाओं को रोजगार देने के लिए पहाड़ी कस्बा के पास डिफेंस कॉरिडोर के नाम पर प्रदेश सरकार ने तीन साल पहले जमीन खरीदी थी। वादा किया था कि इस स्थान पर बंदूक के साथ तोपें भी बनेंगी। इस जमीन पर अभी मात्र सूचना पट ही लग पाया है। पिछले साल बरगढ़ क्षेत्र में फूड प्रोडेक्ट कंपनी लगाने की बात कही गई थी। जमीन खरीदने का कार्य भी शुरू हो गया था। अब मामला ठंडे बस्ते में है।
एयरपोर्ट को फीता कटने का इंतजार
देवांगना घाटी के पास बनाया गया एयरपोर्ट शुरू होने का इंतजार कर रहा है। इस कार्य की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी। पहले डेढ़ किलोमीटर हवाई पट्टी का निर्माण कराया गया था। इस पर निजी विमान ही उतर सकते थे। 2015 में 92.66 करोड़ रुपये से साढ़े तीन किलोमीटर की नई हवाई पट्टी बनाने के लिए हरी झंडी मिली। इसका काम लगभग पूरा है। इंतजार फीता कटने का है।
डिपो की नहीं हो सकी शुरुआत
बेड़ी पुलिया के पास आधुनिक रोडवेज बस अड्डे का निर्माण सपा सरकार में हो गया था। वर्तमान सीएम ने लोकार्पण भी कर दिया, लेकिन आज तक यहां से बसें संचालित नहीं हुईं। इसका कारण बसों की कमी और कार्यशाला के लिए उपकरण न होना बताया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोडवेज बसें न चलने से यहां के निवासी परेशान हैं। कई साल से डिपो खोलने का वादा किया जा रहा है।
मंदाकिनी में गिर रहे नाले नहीं हुए बंद
मंदाकिनी नदी गंदगी से पटी है। चित्रकूट के यूपी वाले हिस्से से करीब 28 छोटे-बड़े नालों का गंदा पानी मंदाकिनी में छोड़ा जा रहा है। इसकी स्वच्छता के लिए आंदोलन चल रहे हैं। समाजसेवी साल भर नदी की सफाई में जुटे रहते हैं। फिर भी नालों को पूरी तरह से बंद नहीं किया जा रहा।
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