हरदोई। भगवान भोलेनाथ-माता पार्वती की आराधना का महाशिवरात्रि सबसे बड़ा आध्यात्मिक और धार्मिक पर्व है। मान्यता हे कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ-माता पार्वती का सनातन धर्म के लोग चार प्रहर में पूजा-अर्चना करेंगे। वहीं पूरे दिन भगवान शिव का अभिषेक मंदिरों और घरों में किया जाएगा।
महाशिवरात्रि पर्व का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। श्रद्धालु श्रद्धा, विश्वास और आस्था के साथ भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की रस्म को पूरा कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन, अभिषेक, व्रत और उपासना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हें। लोक कल्याण की कामना करते हैं। शिवपुराण और धार्मिक ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा मन, पूर्ण ज्ञान और प्रफुल्लता का प्रतीक है। सिर से गंगा की जलधारा से आशय ज्ञान गंगा, वाहन वृषभ नंदी शक्ति का प्रतीक है। भगवान शिव की जटाओं से निकली गंगा जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी हैं।
श्रद्धालुओं ने महाशिवरात्रि पर पूजन-अर्चन के लिए शनिवार को पूरे दिन मंदिरों और घरों पर व्यवस्थाओं को जुटाया। मंदिरों में साफ-सफाई, श्रद्धालुओं के आने-आने और पूजन के लिए व्यवस्थाओं को जुटाया गया। शिवपुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव जी की उपासना से कृपा और आशीर्वाद मिलता है। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ-माता पार्वती का चार प्रहर में इस प्रकार से पूजन-अर्चन का विधान दिया गया है। बताया गया कि प्रथम प्रहर शाम 6:37 बजे से शुरू होगा। ऐसे ही दूसरा प्रहर रात 9:45 बजे, तीसरा प्रहर मध्यरात्रि के बाद 12:53 बजे और चौथा प्रहर रात के बाद और 16 फरवरी की सुबह सुबह 3:47 बजे से शुरू होगा। इस अवधि में की गई पूजा-अर्चना से श्रद्धालु को मनवांछित फल प्राप्त होते हैं।
भक्तों के संकटों का हरण करते हैं श्रीशिव संकटहरण
बेहटागोकुल। शहर से करीब 17 किलोमीटर दूर सकाहा स्थित श्रीशिव संकटहरण बाबा भक्तों के संकटों का हरण करते हैं। मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है। पुजारी सूर्य कमल गोस्वामी ने बताया कि अंग्रेजी शासन में बावन के सेठ लाहौरी मल के इकलौते बेटे को बरेली में फांसी की सजा हो गई थी, एक बार वह बरेली जाते समय यहां जंगल में थक कर विश्राम करने लगे। यहां शिवलिंग देखकर बेटे के लिए प्रार्थना की और प्रार्थना की कि अगर बेटा बच जाए तो वह मंदिर बनवाएंगे। बेटे की फांसी की सजा माफ हो गई, इस पर उन्होंने एक मंदिर बनवाया। 1957 में बेहटागोकुल के थाना प्रभारी रहे शिव शंकर शर्मा के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने भोले बाबा से संतान के लिए प्रार्थना की, उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई, तब उन्होंने ग्रामीणों के सहयोग से भव्य मंदिर बनवाया। महाशिवरात्रि में कई प्रदेशों और जिलों से श्रद्धालु पूजन-अर्चन के लिए आते हैं। महाशिवरातिर पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने व्यवस्थाओं को जुटाया है।
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महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं को मिलेंगे शुभ योग
महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ के लिए कई शुभ योग मिलेंगे। भगवान शिव का डमरू विजय का प्रतीक है, उसके हर शब्द में सत्यम, शिवम और सुंदरम की ध्वनि प्रवाहित होती है। त्रिशूल का अर्थ लोभ, मोह और अहं के बंधन को नष्ट कर ज्ञान, भक्ति और कर्म की शक्ति से है। इस बार महाशिवरात्रि पर कई शुभ योगों बन रहे हैं। 15 फरवरी को सुबह 7:17 से 19:48 तक सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत योग, बुद्ध आदित्य योग, शिवराज योग, श्री लक्ष्मी नारायण योग बन रहे हैं। उत्तराषाढा नक्षत्र, सूर्य कुंभ राशि और चंद्रमा मकर राशि में रहेंगे। -आचार्य सनत्कुमार मिश्रा, अध्यक्ष, सनातनधर्म प्रचार महासभा व आदित्यवाहिनी उप्र
फोटो-14- महाशिवरात्रि पर्व की तैयारी में बाबा विश्वनाथ मंदिर में सजावट करते पुजारी। संवाद
फोटो-14- महाशिवरात्रि पर्व की तैयारी में बाबा विश्वनाथ मंदिर में सजावट करते पुजारी। संवाद