पाली। मथुरा में तैनात उपायुक्त उद्योग के भाई की धारदार हथियार से वार कर हत्या कर दी गई। शनिवार सुबह मुड़रामऊ स्थित मकान में गंभीर रूप से घायल हालत में मिले युवक को मेडिकल कॉलेज में मृत घोषित कर दिया गया। मृतक की मां की शिकायत पर शनिवार सुबह दो लोगों पर दर्ज जानलेवा हमले के मामले में पोस्टमार्टम के बाद हत्या की धाराएं बढ़ाई जाएंगी। पुलिस अधीक्षक ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर परिजनों से पूछताछ की। लगभग ढाई साल पहले मृतक के पिता की भी पिटाई की गई थी और बाद में उनकी मौत हो गई थी।
मुड़रामऊ निवासी रावेंद्र मथुरा में उपायुक्त उद्योग के पद पर तैनात हैं। गांव में उनकी मां गोमती और सबसे छोटा भाई विजय कुमार (35) रहते थे। विजय पैर से निशक्त थे। शनिवार सुबह मकान के आंगन में वह गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़े मिले। उनका पेट फाड़ दिया गया था और आंतें तक बाहर निकल आई थीं। यह देखकर उनकी मां गोमती ने शोर मचाया तो भीड़ लग गई। इस बीच कुछ ग्रामीण घटना का वीडियो बनाने लगे। इसी दौरान विजय ने गांव के कुछ लोगों का नाम लेते हुए हमला किए जाने की बात कही। इसी बीच परिजन उन्हें लेकर पाली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहां से पुलिस को घटना का पता चला। मकान में एक ब्लेड और आरीनुमा धारदार हथियार भी पड़ा मिला।
थानाध्यक्ष सोमपाल गंगवार ने प्राथमिक पूछताछ के बाद घायल को मेडिकल कॉलेज हरदोई रेफर करा दिया। मेडिकल कॉलेज में विजय को मृत घोषित कर दिया गया। दोपहर बाद एसपी अशोक कुमार मीणा ने घटनास्थल का जायजा लिया। मृतक के परिजनों से घटना को लेकर जानकारी की। अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी मार्तंड प्रकाश सिंह ने बताया कि शनिवार सुबह घायल होने की जानकारी पर विजय की मां गोमती की शिकायत पर गांव के ही महावीर और समरपाल के खिलाफ जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया गया था। पोस्टमार्टम के बाद इसमें धाराएं बढ़ाई जाएंगी। विभाग से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि घटना में नामजद किया गया एक शख्स शुक्रवार को अपनी मां के साथ बरेली गया हुआ था। इसके अलावा एक शख्स को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया है।
गैस एजेंसी की चाहत में 13 साल पहले शुरू हुई थी अदावत, पिता की भी हो चुकी हत्या
मथुरा में उपायुक्त उद्योग के पद पर तैनात रावेंद्र और आरोपी महावीर के परिजनों के बीच अदावत की शुरूआत वर्ष 2013 में हुई थी। भारत गैस ने एजेंसी के लिए रिक्तियां प्रकाशित की थीं। छह दिसंबर 2013 को गैस एजेंसी विजय के नाम आवंटित हो गई थी। इसके खिलाफ महावीर ने शिकायत दर्ज करा दी थी। शिकायत दर्ज होने पर विजय की गैस एजेंसी निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद हुई प्रक्रिया में महावीर ने गैस एजेंसी हासिल कर ली थी।
गैस एजेंसी का आवंटन हो गया लेकिन विवाद नहीं थमा। विजय के पिता दयाराम ने फर्जी अभिलेखों का इस्तेमाल कर एजेंसी हासिल किए जाने की शिकायत की। कोर्ट के आदेश पर महावीर के खिलाफ वाद भी दर्ज किया गया। इसके बाद एजेंसी फिर निरस्त हो गई। इसको लेकर विवाद में आठ जून 2023 को दयाराम पर हमला किया गया था। तब दर्ज कराई गई प्राथमिकी में दयाराम ने बताया कि वह खेत से चारा काटकर वापस घर जा रहा था।
रास्ते में गांव के महावीर ने अपने भाई रघुवीर और परिवार के परीक्षित और संदीप, मनोज और रजनीश के साथ मिलकर बांके से वार कर घायल कर दिया। इलाज के दौरान दयाराम की मौत होने पर गैरइरादतन हत्या की धाराएं बढ़ाई गईं। इस मामले में आरोपियों में शामिल महावीर डेढ़ साल पहले जमानत पर छूट गया था। शनिवार सुबह हुई घटना को पुराने विवाद से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
दो लोगों के घर में घुसा था विजय, यूपी 112 पर दर्ज हैं दोनों मामले
विजय कुमार शुक्रवार आधीरात के बाद 1:13 बजे गांव में ही आशीष वाजपेयी के घर में घुस गया था। इस पर परिजनों ने ऐतराज जताते हुए यूपी 112 पर घटना की जानकारी दी। आशीष के परिजनों ने किसी तरह समझा-बुझाकर विजय को उसके घर पहुंचाया। इसमें विजय की मां गोमती ने भी सहयोग किया था। 1:25 बजे पहुंची यूपी 112 की टीम ने विजय को समझाकर घर में ही रहने की नसीहत दी थी। इसके बाद शनिवार सुबह लगभग पांच बजे विजय अपने मकान के सामने रहने वाले सुशील के घर में घुस गया।
दावा है कि विजय शराब के नशे में था। सुशील ने उसकी मां गोमती को बुलाया। दोनों उसे किसी तरह मकान के आंगन में ले गए। इसकी जानकारी भी यूपी 112 को दी गई थी और पुलिस टीम फिर से विजय को हंगामा न करने की नसीहत देकर आई थी। इसके बाद सुबह 7:30 बजे विजय घर के आंगन में ही घायल पड़ा मिला।
पांच दिन से कर रहा था अजीब हरकतें, चाचा से जताई थी हत्या की आशंका
विजय पिछले चार पांच दिन से अजीब हरकतें कर रहा था। इस दौरान वह खुद की हत्या किए जाने की आशंका भी जता रहा था। इसके अलावा वह किसी के भी घर में घुस जा रहा था। मां गोमती ने शनिवार सुबह जो प्राथमिकी दर्ज कराई उसमें भी इस बात का उल्लेख है कि विजय अजीब हरकतें कर रहा था। इस कारण वह अपने भतीजे हीरालाल काे बुलाने गई थीं। वापस आने पर विजय लहूलुहान पड़ा मिला। विजय के चाचा रामपाल ने बताया कि उनको शुक्रवार रात फोन कर विजय ने कहा था कि चार पांच लोग उसका पीछा करते हैं और हत्या कर सकते हैं।
हमें न उठाओ, भइया को आ जाने दो
आंगन में गंभीर रूप से घायल पड़े विजय को कुछ लोगों ने उठाकर अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। इस दौरान उसने सबको मना कर दिया। यह भी कहा कि अभी हम जिंदा हैं। हमें न उठाओ। भइया को आ जाने दो। विजय की आंतें बाहर आ जाने के कारण खून लगातार बह रहा था और फिर जबरन कुछ लोगों ने उसे पीएचसी पहुंचाया।
फोटो-01- विजय। फाइल फोटो