कानपुर देहात/झींझक। जिले में जहां बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है वहीं सरकारी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। सोमवार को झींझक निवासी महिला की बुखार से कानपुर के प्राइवेट अस्पताल में मौत हो गई। वहीं सीएचसी में सोमवार को बुखार पीड़ित 11 मरीज आए।
इनमें से आशा बहू की हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल समेत अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में बुखार के मरीजों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। वहीं जिला अस्पताल की ओपीडी में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। सोमवार को करीब सवा सात सौ मरीज उपचार कराने पहुंचे।
झींझक कस्बे के आजाद नगर मोहल्ला निवासी नेहा (28) पत्नी नितिन उर्फ अंशू पोरवाल को चार दिनों पहले बुखार आया था। परिजन उसे औरैया के एक अस्पताल में इलाज के लिए ले गए। वहां जांच कराने पर प्लेटलेट्स काफी मिले। हालत मेें सुधार न होने पर शनिवार को परिजन उसे कानपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में ले गए। वहां सोमवार की सुबह महिला की मौत हो गई।
इसकी सूचना पर घर में पुत्र अर्जुन, शिब्बू, सास सरोज आदि का रो-रोकर बुरा हाल रहा। परिजन शव का अंतिम संस्कार करने के लिए खेरेश्वर घाट गए। वहीं सोमवार को सीएचसी झींझक की ओपीडी में 188 मरीजों में 11 मरीज बुखार के आए। जिसमें सडऱामऊ की आशा बहू बीनू देवी की प्राइवेट अस्पताल मेें इलाज के दौरान हालत बिगड़ने पर सीएचसी लाया गया।
वहां डॉ. वरुण द्विवेदी ने प्लेटलेट्स कम होने पर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। रविवार को छुट्टी के बाद सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी खुली तो बड़ी संख्या में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। सबसे अधिक मरीज बाल रोग विशेषज्ञ व फिजीशियन कक्ष में पहुंचे।
यही हाल ग्रामीण क्षेत्र की सीएचसी, पीएचसी का रहा। जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि डेंगू व बुखार मरीजों के लिए दस बेड का वार्ड आरक्षित किया गया है। ओपीडी में बुखार व मौसमी बीमारियों के मरीज काफी संख्या में आ रहे हैं। सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 725 मरीज आए हैं।
बुखार पीड़ित मरीज मिलने पर टीम को गांवों में भेजकर रक्त का नमूना लिया जा रहा है। इसके साथ पीड़ितों को दवा का वितरण कराया जा रहा है। वहीं मलेरिया विभाग की टीमें गंदगी वाले स्थानों पर दवा का छिड़काव व फॉगिंग कर रही हैं। -डॉ. एपी वर्मा, डिप्टी सीएमओ/संक्रामक रोग नोडल अधिकारी
सीएचसी में चार व पीएचसी में दो बेड आरक्षित
कानपुर देहात। जिले में बुखार से करीब एक दर्जन मौतों के बाद स्वास्थ्य महकमे के अफसर हरकत में आए हैं। जिला चिकित्सालय अकबरपुर में डेंगू व बुखार मरीजों के लिए दस वार्ड आरक्षित करने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में भी बेड आरक्षित किए गए हैं। डिप्टी सीएमओ डॉ. एपी वर्मा ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चार व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दो बेड डेंगू व बुखार मरीजों के लिए आरक्षित किए गए हैं।
आठ माह मेें सिर्फ 11 हजार की जांच, 12 मलेरिया पॉजिटिव मिले
कानपुर देहात। मानसूनी बारिश के बाद जिले में आई बाढ़ से मच्छरजनित व अन्य संक्रामक बीमारियों ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। वहीं स्वास्थ्य महकमा पिछले आठ माह मेें 11323 संदिग्धों की मलेरिया जांच के लिए स्लाइड बना पाया है। इनमें से सिर्फ 12 केस मलेरिया पॉजिटिव मिल सके हैं। जबकि जमीनी हकीकत ठीक इसके उलट है।
पिछले दिनों आई बाढ़ व जलभराव के चलते मौजूदा समय में गंदगी से गांव-गांव मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। जिससे डेंगू जैसे लक्षण, मलेरिया व बुखार के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके बावजूद इलाज के नाम पर महज खानापूरी की जा रही है। जिला अस्पताल में ही रोज एक सैकड़ा से अधिक मरीज बुखार के पहुंच रहे हैं।
इसी तरह के 11 सीएचसी व 23 पीएचसी में बने हुए हैं। जबकि प्राइवेट अस्पतालों में पहुंचने वाले बुखार मरीजों का सटीक आंकड़ा तक नहीं है। इन सबसे बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से जनवरी से लेकर अब तक सिर्फ 11323 संदिग्धों की ही मलेरिया जांच के लिए स्लाइड बनाई जा सकी है।
सहायक मलेरिया अधिकारी देवेश दीक्षित ने बताया कि अभी तक जिला अस्पताल में 2608 व स्वास्थ्य केंद्रों पर 9715 संदिग्धों की स्लाइड बनाई गई है। जिनमें से 12 केस मलेरिया पॉजिटिव मिले हैं। अस्पतालों में आने वाले अधिक से अधिक मरीजों की रक्त पट्टिका बनाने के निर्देश दिए गए हैं।