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वायरल फीवर : निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में लगी बाल रोगियों की कतार, हैलट के सभी 120 बेड फुल

Wed, 01 Sep 2021 01:24 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

ज्यादातर बच्चों में एक ही जैसे ही लक्षण मिल रहे हैं। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव का कहना है पिछले एक माह से ओपीडी में केस डेढ़ गुना बढ़े हैं। पहले रोजाना औसतन 100 बच्चों की ओपीडी होती थी, जो अब बढ़कर डेढ़ सौ पहुंच गई है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कानपुर में कोरोना के बाद अब वायरल फीवर का हमला तेज हो गया है। यह वायरल सबसे ज्यादा बच्चों को प्रभावित कर रहा है। हैलट के बाल रोग विभाग समेत निजी अस्पतालों और क्लीनिक में बाल रोगियों की लाइन लगी है। इस वायरल संक्रमण के बाद फेफड़े में जकड़न हो जा रही है।
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ऐसे बाल मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। इस वजह से हैलट के बेड फुल हो गए हैं। एक-एक बेड पर दो-दो बच्चों को लिटाकर इलाज किया जा रहा है। भीड़ की वजह से कई बच्चों को बगैर देखे ही लौटा दिया जा रहा है। हैलट के बाल रोग विभाग में 120 बेड हैं, जबकि वर्तमान में 150 बच्चे भर्ती हैं।

रोजाना सैकड़ों बच्चों को परिजन ओपीडी में दिखाने ला रहे हैं। ज्यादातर बच्चों में एक ही जैसे ही लक्षण मिल रहे हैं। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव का कहना है पिछले एक माह से ओपीडी में केस डेढ़ गुना बढ़े हैं। पहले रोजाना औसतन 100 बच्चों की ओपीडी होती थी, जो अब बढ़कर डेढ़ सौ पहुंच गई है। बताया कि ज्यादातर में डायरिया और सांस की समस्या मिल रही है।
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पेट दर्द से कराह रहे बच्चे को बिना देखे लौटाया
अकबरपुर निवासी हलीम आठ वर्षीय बेटे शाहिम को एंबुलेंस से हैलट के बाल रोग विभाग लेकर पहुंचे। पेट दर्द से कराह रहे शाहिम को एंबुलेंस चालक गेट पर ही उतार कर चला गया। हलीम बेटे को लेकर इमरजेंसी पहुंचे। उसकी गंभीर हालत देखकर सभी बेड फुल होने की बात कहकर डॉक्टर ने बिना जांच के लौटा दिया।

बाहर से मंगाई जा रहीं दवाएं
सांस की बीमारी से पीड़ित यशु के परिजनों ने बताया कि उसकी मां की कुछ दिन पहले हत्या हो गई थी। हमले के दौरान यशू भी मां के साथ था। चोट लगने के कारण उसे सांस लेने में समस्या होने लगी थी। परिजनों ने बताया कि कुछ दवाएं तो दी गईं लेकिन ज्यादातर दवाएं बाहर से लाने को कहीं जा रही हैं। बताया कि अब तक तीन हजार रुपये की दवा ला चुके हैं। 
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