थर्ड रेल का प्रयोग करती हैं मेट्रो
अब आईआईटी से नयागंज तक लगभग 15 किलोमीटर लंबे मेट्रो रूट पर ट्रेन चलाने का रास्ता तैयार कर लिया गया है। इस सिस्टम में करंट की सप्लाई हरदम चालू मानी जाएगी। 750 वोल्ट डीसी करंट पर चलने वाली मेट्रो ट्रेनें परिचालन के लिए पारंपरिक तौर पर प्रयोग होने वाली ओएचई (ओवर हेड इक्युपमेंट) प्रणाली की जगह पर ट्रैक के समानांतर बिछी हुई थर्ड रेल का प्रयोग करती हैं।
शुक्रवार को मेट्रो के ट्रायल के दौरान सिग्नलिंग, ट्रैक, पावर सप्लाई आदि की जांच में मिले डाटा का विश्लेषण किया जाएगा, जिससे परिचालन में मदद मिलेगी। विभिन्न विभागों के आपसी तालमेल और सहयोग से नयागंज अंडरग्राउंड स्टेशन तक सिस्टम इंस्टॉलेशन के कार्य लगभग पूरे किये जा चुके हैं। जल्द ही इन स्टेशनों के फिनिशिंग का भी कार्य पूरा कर लिया जाएगा। -सुशील कुमार, एमडी, यूपीएमआरसी
कॉरिडोर-2 के दोनों सेक्शनों में भी चल रहा निर्माण
लगभग 24 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर-1 (आईआईटी-नौबस्ता) के अंतर्गत मेट्रो की यात्री सेवाएं 9 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर (आईआईटी-मोतीझील) पर चल रहीं हैं। चुन्नीगंज-नयागंज और कानपुर सेंट्रल-ट्रांसपोर्ट नगर भूमिगत सेक्शन के अलावा लगभग 5 किलोमीटर लंबे बारादेवी-नौबस्ता एलिवेटेड सेक्शन में भी निर्माण तेजी से हो रहा है। लगभग 8.60 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर-2 (सीएसए-बर्रा 8) के दोनों सेक्शनों में भी निर्माण हो रहा है।