इन्होंने उस मकान को लीज पर मनोज पांडेय को दे रखा था। ऐसे में एसपी का नंबर प्लेट मिलना जांच का विषय है। जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
कर्मचारी की कई बार की गई थी शिकायत
पीड़ित छात्राओं ने बताया कि आरोपी आए दिन कमरों में ताकझांक करता था। दरवाजा खुला होने पर साफ सफाई और कूड़ा उठाने का बहाना लेकर अचानक आ जाता था। इसकी शिकायत उन्होंने कई बार हॉस्टल की वार्डेन और संचालक से की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती थी।
हॉस्टल के कैमरे निकले खराब
हॉस्टल में लगे सारे सीसीटीवी कैमरे खराब मिले। ऐसे में हॉस्टल की सुरक्षा राम भरोसे ही चल रही थी। हॉस्टल में 70 छात्राएं होने के बावजूद वहां कोई सुरक्षा कर्मी तैनात नहीं था।
अब तक की जांच में पता चला कि मकान एसपी का नहीं है। उनका नंबर प्लेट किसने और कब लगाया। जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -आनंद प्रकाश तिवारी, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर