एक साल चलता रहा था आजादी का जश्न
गोविंद नगर की रहने वालीं 82 वर्षीय कृष्णा सिंह ने बताया कि गांव में भारत माता की जय के नारे लग रहे थे। तभी खुशिया दादा ने आकर खबर दी कि हमारा देख आजाद हो गया है। हम तो बच्चे थे, लेकिन पिता जी खुशी से झूम उठे और हाथ में तिरंगा झंडा लेकर बाहर निकल गए।
जाते जाते अम्मा से बोले पुआ बनाओ, आज खुशी का दिन है। इसके बाद अम्मा हम तीनों भाई बहन को लेकर कुटिया पर पहुंचीं, जहां सबने मिलकर झंडा फहराया। आजादी का वो जश्न लगभग एक साल तक चलता रहा था। लोगों की खुशियां देखते ही बनती थीं।
जब सड़कों पर गोरे नजर आना बंद हो गए
नवशील धाम के रहने वाले 100 साल के रवि शंकर मेहरोत्रा (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी) ने बताया कि प्रताप प्रेस में क्रांतिकारियों संग बिताए दिन जहन में बसे हैं। उनके लिए घर से कपड़ों में खाना छिपाकर ले जाते थे। 14 अगस्त से ही आजादी मिलने की सूचना मिल गई थी।
पहली सुबह थी, जब सड़कों पर गोरे नजर आना बंद हो गए थे। शायद ही कोई चौराहा बचा हो जहां तिरंगा न फहरा हो और मिठाई न बंटी हो। हम सभी स्वतंत्रता सेनानी मेस्टन रोड पर थे। घरों में मीठा पकवान बन रहा था और चारों तरफ खुशी का माहौल था।