बेटी का दावा: पिताजी ने कानपुर में फहराया था पहली बार तिरंगा
काशी नारायण की 70 वर्षीय बेटी कमला गुप्ता बताती हैं कि 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। देश आजाद होने के बाद मेस्टन रोड पर मंदिर में पहली बार उनके पिता ने तिरंगा लहराया था। बताया कि गांधी जी से प्रेरित होकर वे स्वच्छता अभियान से जुड़े थे। गलियों में सफाई करते थे।
देश के लिए लड़े, पकड़े नहीं गए और पेंशन नहीं भी नहीं ली
भूसाटोली कछियाना के रहने वाला स्व. सूर्यदेव शुक्ला और उनके पुत्र स्व. भूदेव शुक्ला ने भी आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया। खास बात यह है कि दोनों को अंग्रेज कभी पकड़ नहीं पाए। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के बाद भी किसी ने पेंशन या अन्य योजना का लाभ नहीं लिया। भूदेव शुक्ला के बेटे स्वदेश ने बताया कि बाबा सूर्यदेव सिंकदरपुर कर्ण जिला उन्नाव में रहते थे। स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने की वजह से घर पर पुलिस की दबिश पड़ने लगी। इसके चलते परिवार के साथ कानपुर आ गए और ठेकेदार बनकर स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया।