इसके बाद भूकंप आने के प्रमाण नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि पृथ्वी के नीचे एनर्जी स्टोर हो रही है, लेकिन अभी तक रिलीज नहीं हुई है। इसलिए भूकंप आने की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि इसका सटीक समय नहीं बताया जा सकता है। समय निश्चित भले ही न हो लेकिन भूकंप आना निश्चित है। उत्तराखंड में भूकंप आता है तो उसके झटके कानपुर, लखनऊ, बरेली और आसपास के इलाकों में जरूर लगेंगे। तीव्रता के आधार पर ही तबाही का आकलन हो सकता है।
सावधानियों पर दें ध्यान
प्रो. जावेद ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन समय रहते जानकारी काफी बचाव कर सकती है। उन्होंने कहा कि बिल्डिंगों का निर्माण बिल्डिंग कोड के नियमों के अनुसार ही करें।