बुंदेलखंड और सेंट्रल यूपी के जिलों में बाढ़ प्रभावित जिलों में निरंतर जलस्तर घटने से राहत महसूस की जा रही है, लेकिन अब विभिन्न रोगों ने घेरना शुरू कर दिया है। पानी निकलने से कीचड़, दलदल की समस्या का भी ग्रामीणों को सामना करना पड़ रहा है।
हमीरपुर शहर में बेतवा व यमुना नदियां अपना कहर दिखाने के बाद सिमटने लगी हैं। बेतवा नदी 35 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रही हैं तो यमुना नदी 60 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से नीचे खिसक रही है। हालांकि पांच दिन तक निचले क्षेत्र में पानी भरे होने से ज्यादातर कच्चे मकान जमींदोज हो चुके हैं।
लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो रहे हैं। चित्रकूट के मऊ व राजापुर क्षेत्र में जलभराव की समस्या अभी भी बरकरार है। दर्जनों सड़कें पानी में डूबी हुई हैं। जालौन में जलस्तर घटने से राहत के साथ अब गांवों में मकान गिरने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इटावा में यमुना और चंबल नदी में बाढ़ से प्रभावित 45 गांवों में अभी भी दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। नदियों का जलस्तर घट रहा है। परंतु कीचड़, गंदगी और घरों में हुए नुकसान से ग्रामीणों के सामने रहने, खाने पीने और इलाज की गंभीर समस्या है।