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राकेश टिकैत बोले: बुंदेली युवा घरों से निकल फसल व नस्ल बचाएं, केंद्र सरकार देश की संपत्तियाें को बेचने पर तुली

Sun, 12 Sep 2021 08:21 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर

सार

बुंदेलखंड का कठिया गेहूं बड़े व्यापारी 160 रुपये किलो में बेच रहे, जबकि यहां सिर्फ 16 रुपये प्रति किलो खरीदा जा रहा। बुंदेलखंड में सबसे अधिक खनिज संपदा है, बावजूद बुंदेली बदहाल जीवन गुजार रहे हैं।
 
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राकेश टिकैत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हमीरपुर जिले में महापंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत रविवार को केंद्र सरकार पर जमकर बरसे। कहा, तीनों कृषि कानून कहीं से भी किसानों के हित में नहीं हैं, बल्कि कानून पूंजीपतियों के लिए बनाए गए हैं। बुंदेली युवाओं से आह्वान किया कि घरों से निकलकर फसल और नस्ल को बचाएं, वरना कुछ समय बाद पूंजीपतियों के यहां निराई-गुड़ाई करते नजर आएंगे।
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मौदहा गल्ला मंडी में किसानों की पंचायत को संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा कि बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है, यहां का नौजवान काम की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। केंद्र सरकार की मुखालफत करते हुए कहा कि सरकार बड़े उद्योग घरानों के साथ मिलकर छोटे व्यापारी, दुकानदार और किसानों को बर्बाद कर रही है।

सरकार कहती है कि मंडी के बाहर माल बेचो। इससे जब मंडी की आय घटेगी तो ये कई कई हजार रुपये में अपने चहेतों को मंडियां बेच लेंगे। चेतावनी दी कि जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती और किसानों के हित में खड़ी नहीं होती, तब तक यूनियन का धरना प्रदर्शन चलता रहेगा।
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कहा कि बुंदेलखंड पैकेज से मंडियां तो बनाई गईं, लेकिन नौकरीशाही से मिलकर भ्रष्टाचार हुआ। बुंदेलखंड का कठिया गेहूं बड़े व्यापारी 160 रुपये किलो में बेच रहे, जबकि यहां सिर्फ 16 रुपये प्रति किलो खरीदा जा रहा। बुंदेलखंड में सबसे अधिक खनिज संपदा है, बावजूद बुंदेली बदहाल जीवन गुजार रहे हैं।

कहा कि बुंदेलखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए स्कूल खोले जाएं। बुंदेलखंड में औद्योगिक बोर्ड की स्थापना करने, किसानों के लिए अन्ना प्रथा पर काम और कर्जमाफी की तरफदारी भी की। टिकैत ने कहा कि भाजपा सरकारें धर्म के नाम पर राजनीति चमका रही हैं।
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वह ये न भूलें कि भगवान राम हमारे हैं और हम उनके वंशज हैं। प्रदेश अध्यक्ष चौधरी राजीव सिंह जादौन ने कहा कि बुंदेलखंड की सबसे बड़ी समस्या किसानी के साथ अन्ना प्रथा है। कहीं भी गोशाला नहीं बनी हैं। अगर कहीं बनी हैं तो सिर्फ तारबाड़ी कर गायों को बंद कर दिया गया है।

आरोप लगाया कि अन्ना प्रथा से किसानों की खेती बर्बाद कराने का काम किया जा रहा है। पंचायत को पूर्व मंत्री बशीरुद्दीन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी राजेश सिंह, चौधरी बलराम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ केतकी सिंह ने भी संबोधित किया।
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