पूर्व बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड
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कानपुर के चर्चित पिंटू सेंगर हत्याकांड में नामजद आरोपी महफूज अख्तर की जेल से रिहाई की उम्मीद टूट गई है। उसे पिछले माह हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जेल से रिहाई पर रोक लगा दी है।
इससे पहले एक अन्य आरोपी सिपाही श्याम सुशील मिश्रा की रिहाई पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने महफूज अख्तर को दो जुलाई को जमानत पर रिहा करने के आदेश दे दिए थे। इसके खिलाफ पिंटू के भाई धर्मेंद्र सिंह सेंगर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड
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मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना समेत तीन न्यायमूर्तियों की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। धर्मेंद्र के अधिवक्ता संदीप शुक्ला ने न्यायालय में तर्क रखा कि महफूज एफआईआर में नामजद आरोपी है। उस पर पिंटू की हत्या और उसके लिए सुपारी देने का आरोप है।
हाईकोर्ट में महफूज का अधूरा आपराधिक इतिहास पेश किया गया, जिसके आधार पर उसे जमानत मिल गई। जमानत के दौरान सिर्फ छह मुकदमों का आपराधिक इतिहास बताया गया और उनमें भी दोषमुक्त होने की बात कही गई, जबकि महफूज के खिलाफ कुल 18 मुकदमे दर्ज हैं।
उन्नाव में उसके खिलाफ गैंगस्टर भी लगा है। बलिया में भी एक मुकदमे में आरोपी है। वह अंतर्राज्यीय अपराधी है। संदीप ने बताया कि सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है, तब तक के लिए महफूज की रिहाई पर रोक लगा दी है। 20 जून 2020 को जेके कॉलोनी में दिनदहाड़े गोलियां बरसाकर शूटरों ने पिंटू की हत्या कर दी थी। अगले दिन चकेरी थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी।