कानपुर के कुरसौली में रोगियों की मौतें किस रोग से हुई हैं? यह पता नहीं चला है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज की टीम ने हर मौत का अलग-अलग कारण बताया है। हालांकि रोगी जब बीमार पड़े तो उनमें शुरुआती लक्षण एक जैसे रहे हैं। बुखार आने के बाद रोगियों के ब्लीडिंग भी हुई। लेकिन विशेषज्ञों ने डेथ ऑडिट की जो रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी है, उसमें खानापूरी नजर आ रही है।
वायरल फीवर से सिर्फ तीन-चार मौत ही बताई गई हैं। कुरसौली में बुखार आने के बाद हुई मौतों को शुरू से ही गंभीरता से नहीं लिया गया। उसी का नतीजा है कि जीएसवीएम मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों की डेथ ऑडिट रिपोर्ट ढाक के तीन पात साबित हुई। रोगी निजी अस्पतालों में भर्ती हुए, जहां उनकी पूरी जांचें नहीं हुईं।